पटना : रेलवे का निजीकरण असंभव है. चाह कर भी कोई ऐसा नहीं कर सकता. यही सिस्टम बरकरार रहेगा. देश में रक्षा मंत्रालय के बाद सबसे अधिक कर्मियों और संपत्ति के मामले में रेलवे सबसे बड़ा मंत्रालय है. पटना में पहले जहां प्रतिदिन तीन-चार विमान उतरते थे वहीं अब 48 फ्लाइट आते-जाते हैं. अच्छी सड़कें बनीं, रुरल सड़कों की भी मेंटेनेंस पॉलिसी बना दी गयी. इसके बावजूद परिवहन के सभी माध्यमों में से सबसे अधिक यात्रा लोग रेल से ही करते हैं. यह राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है.
इसका परिचालन सही तरीके से होना चाहिए. ये बातें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रेल कर्मियों की मांग पर कहीं. वे शनिवार को ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के सातवां क्षेत्रीय युवा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इसका आयोजन पटना स्थित रेलवे के सामुदायिक भवन में किया गया था. इस सम्मेलन में कर्मचारी यूनियन के नेताओं ने रेलवे का निजीकरण रोकने और रेल कर्मियों की समस्याओं पर प्रधानमंत्री और रेल मंत्री से बात करने का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आग्रह किया.
इस पर नीतीश कुमार ने कहा कि वे कर्मचारी यूनियन की मांगों के साथ हैं. उन्हें राजनैतिक तौर पर संगठन से भावनात्मक लगाव है क्योंकि इस संगठन के अध्यक्ष उनके सम्माननीय नेता जयप्रकाश नारायण रहे हैं. इसलिए संगठन के कर्मियों को जब भी जरूरत हो उनसे संपर्क कर सकते हैं. वहीं युवा रेलकर्मियों से उन्होंने कहा कि वे ऐसे संगठन और संस्थान से जुड़े हैं जो राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है.
बड़ी संख्या में आज भी लोग रेल से सफर करते हैं, इसलिए इसका परिचालन सही तरीके से होना चाहिए. समारोह को पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह, ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के जेनरल सेक्रेटरी शिवगोपाल मिश्र, ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के प्रेसिडेंट विश्वमोहन सिंह ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष मुरारी सिंह, महामंत्री एसएनपी श्रीवास्तव, यूनियन के एडिशनल सेक्रेटरी पीके पाण्डेय सहित अन्य लोग मौजूद रहे.
रेलवे के बारे में गहराई से जानकारी की जरूरत
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे कई मंत्रालयों में मंत्री रह चुके हैं. आज वे मुख्यमंत्री हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि उन्हें चीजों की जानकारी नहीं होती. उन्होंने कहा कि देश में बड़ी संख्या में रेलकर्मी हैं.
उनकी समस्याओं का समाधान किये बिना कर्मियों का मनोबल नहीं बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि रेलवे के बारे में गहराई से जानकारी लिये बिना काम करना मुश्किल है. अपने रेलमंत्री के कार्यकाल के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे ट्रैक की स्थिति का निरीक्षण करने के लिए अधिकारियों के साथ वे व्यक्तिगत रूप से जाते थे.
रेल मंत्री के रूप में किये कार्यों का किया जिक्र
नीतीश कुमार ने अपने रेल मंत्री रहने के दौरान किये कार्यों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि पूर्व मध्य रेल (ईसीआर) जोन का गठन उन्होंने ही करवाया. उसके पहले रेलवे का धनबाद मंडल मुनाफे के मामले में देश में दूसरे नंबर पर था. ईसीआर में इसे शामिल करने बाद आज ईसीआर भी मुनाफे में है. उस समय ईसीआर का बहुत रेल डिब्बा मरम्मत के लिए कोलकाता जाता था. वहां नया रखकर पुराना डिब्बा दे दिया जाता था. रेलवे संरक्षा से जुड़े कर्मियों को एक उम्र के बाद काम करने में कठिनाई होती थी. इसलिए ऐसी व्यवस्था की गयी कि ये कर्मी तय उम्र सीमा के बाद वीआरएस ले लें. साथ ही उनके आश्रित को नौकरी दे दी जाये. रेलवे ड्राइवर को पायलट का नामकरण दिया. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने हरनौत रेल कारखाने का शिलान्यास किया, जो अब बनकर तैयार है. ईस्ट सेंट्रल रेलवे पांच डिवीजन वाला हो गया है, जिसको देखते हुए यहां मेंटेनेंस का काम होना चाहिए.
अटल सरकार के दौर को किया याद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि वे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री थे. उस समय गैसल रेल दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने त्यागपत्र दे दिया. इस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उनसे कहा, ‘पटरियां फिर मिलेंगी.’ बाद में वर्ष 1998 में उन्हें फिर से रेल मंत्रालय की जिम्मेवारी सौंप दी गयी.
नीतीश कुमार ने बताया कि दोबारा रेल मंत्री बनने के बाद रेलवे की संरक्षा के लिए 17 हजार करोड़ रुपये का रेलवे सेफ्टी फंड बनाने का प्रस्ताव दिया. इसमें रेलवे ट्रैक रिप्लेस करने, सिग्नल सिस्टम ठीक करने, रेल डिब्बा बदलना शामिल था. इसे लेकर रेलवे, वित्त मंत्रालय, योजना आयोग और प्रधानमंत्री कार्यालय के पदाधिकारियों की तीन घंटे तक बैठक हुई. कोई निर्णय नहीं हो सका.
अंत में अटल बिहारी वाजपेयी के साथ वे और तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा बैठे. अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि यह प्रस्ताव ठीक है. इस पर उनसे तुरंत घोषणा करने आग्रह किया. नीतीश कुमार ने बताया कि उनके आग्रह पर फंड बनाने की घोषणा हुई. इसमें उनके प्रस्ताव के अनुरूप 12 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था केंद्र सरकार और पांच हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था रेलवे टिकट पर सेस लगाकर की गयी.
