योजना की गति काफी धीमी, किस्त लेने के बाद लाभुक नहीं बनाते घर
पटना : राज्य में पीएम आवास योजना की गति काफी धीमी बनी हुई है. इसका मुख्य कारण है, पहली किस्त लेने के बाद लाभुक घर का निर्माण ही नहीं करते या घर का निर्माण कार्य काफी धीमी गति से करते हैं.
पहली और दूसरी किस्त लेने वालों की संख्या में पांच गुना का अंतर है. चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के अंतर्गत आठ लाख 68 हजार लोगों को पहली किस्त दी गयी है. जबकि, दूसरी किस्त महज एक लाख 80 हजार लोगों को ही मिली है. तीसरी किस्त लेने वालों की संख्या तो इससे भी कम है. फिर भी दूसरी और तीसरी किस्त लेने वाले लोगों के बीच की संख्या में ज्यादा का अंतर नहीं है.
जबकि, पहली और तीसरी किस्त लेने वालों के बीच का ज्यादा बड़ा है. तीसरी किस्त एक लाख आठ हजार लोगों ने प्राप्त की है. इससे यह स्पष्ट होता है कि जिन्हें दूसरी किस्त मिल जाती है, उसमें तीसरी किस्त लेने वाले अधिकतर लोग मकान बना ही लेते हैं. पहली किस्त लेने के बाद ही इसे पक्के मकान तक पहुंचाना मुश्किल होता है. इसके कारण कई स्तर पर हैं.
पहली किस्त लेने के बाद इस राशि से मकान का प्लिंथ तक का भी निर्माण नहीं करवा रहे या भवन का कार्य ही नहीं शुरू किया है. इसी वजह से राशि मिलने के बाद भी राज्य में पांच लाख 82 हजार से ज्यादा मकान अधूरे पड़े हुए हैं. अब इन्हें पूरा करवाना ही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है.
अब तक बने महज 79 हजार आवास
इस वर्ष दिसंबर तक 11 लाख 76 हजार प्रधानमंत्री आवास बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. लेकिन अब तक महज 79 हजार आवास ही तैयार हो पाये हैं. जबकि, पहली किस्त आठ लाख 68 हजार लाभुकों को दी जा चुकी है. पर इस किस्त के मिलने के बाद काम शुरू या पहले चरण का ही काम नहीं होने की वजह से इसकी रफ्तार एकदम से थम गयी है.
अब इसमें गति लाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने मुख्यमंत्री आवास प्रोत्साहन योजना की शुरुआत की है. इसके तहत राशि मिलने के एक वर्ष के अंदर आवास बनाने वालों को एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाती है. अब तक किसी को इस योजना के तहत राशि नहीं दी गयी है.
पहली किस्त की समुचित मॉनीटरिंग नहीं
किसी लाभुक को पहली किस्त के रूप में 40 हजार मिलने के बाद इससे गृह निर्माण शुरू करवाने के गृह सहायकों की तैनाती की गयी है. परंतु इनके स्तर पर इसकी सही मॉनीटरिंग नहीं होने से ये रुपये गरीब लाभुक अन्य कहीं खर्च कर देते हैं.
प्राप्त सूचना के अनुसार पहली किस्त मिलने के बाद लाभुकों से कई बार 10 से 20 हजार तक रुपये दलाल भी ठग लेते हैं. ऐसी स्थिति में भी मकान का निर्माण शुरू नहीं हो पाता है. हालांकि, विभागीय अधिकारी पहली किस्त मिलने के बाद मकान शुरू नहीं होने से संबंधित कुछ भी स्पष्ट कारण नहीं बता पा रहे हैं.
