जान खतरे में रख कर नाव का सफर कर रहे बिंद टोली के लोग, 30 से अधिक परिवारों की जान पर आफत
पटना : सोन नदी से आ रहे पानी से गंगा में बढ़ते जल स्तर से जिले में बिंद टोली, नकटा दियारा, दानापुर का पाटीपुर इलाका और राघोपुर दियारा का स्थिति नाजुक बनी हुई है. सबसे खराब स्थिति बिल्कुल गंगा की गोद में बसे बिंद टोली की है. बीते पांच दिनों से लगभग 30 से अधिक घरों में पानी घुस चुका है. वहीं जो लोग मिट्टी के बने टीले पर जाकर बस गये हैं, उनकी जान आफत में ही बनी हुई है. वहीं लगातार बढ़ रहे जल स्तर पर रविवार को एक राहत भरी बात रही. रविवार को गांधी घाट व बिंद टोली से छह इंच से अधिक पानी घटा है. हालांकि सोन नदी पर बने बाणसागर बांध से छोड़े गये पानी का असर गंगा के घाटों पर सोमवार से दिखना शुरू हो जायेगा.
20 से अधिक घर डूबे, खराब नाव पर आ-जा रहे हैं लोग
सबसे खराब स्थिति कुर्जी बिंद टोली को लेकर है. वहां बीते पांच दिनों से लगभग 30 घरों में पानी भर चुका है. शहर से उसका कनेक्शन कटा हुआ है. प्रशासन ने इसको लेकर पांच नावों का परिचालन भी शुरू करवाया है, लेकिन जमीनी हकीकत है कि प्रशासन की ओर से काम पर लगे नाविक अधिकांश समय गायब ही रहते हैं. सुबह-शाम परिचालन की खानापूर्ति की जा रही है. रविवार को प्रभात खबर टीम ने इसकी जांच की जो दोपहर 12 बजे के बाद सरकारी नावों का परिचालन बंद कर दिया गया है. लोग प्राइवेट छोटी नाव में सफर कर रहे हैं. खराब व टूटी नाव पर 30 से अधिक लोगों को सवार किया जा रहा है.
बाणसागर से पानी छोड़ने के बाद अगले दिनों में एक बार फिर से पानी बढ़ने की संभावना है. प्रतिदिन इसकी जानकारी ली जा रही है. अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे है. इसलिए राहत शिविरों को चालू नहीं किया गया है.
—कुमार रवि,
जिलाधिकारी
नहीं मिल रहा है राशन
सबसे अधिक समस्या बिंद टोली में राशन को लेकर हो रही है. चूंकि गंगा अभी खतरे के निशान के नीचे बह रही है, लेकिन बिंद टोली के आधे से अधिक घर बीते कई दिनों से डूब चुके हैं. अब प्रशासन के अधिकारी तकनीकी पेच के आधार पर लोगों को राशन नहीं दे रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि जब तक गंगा खतरे के निशान से ऊपर नहीं बहती है तो आपदा विभाग से राहत सामग्री का वितरण नहीं किया जा सकता है.
नकटा दियारा की भी स्थिति नाजुक
नकटा दियारा में भी पानी को लेकर स्थिति नाजुक बनी हुई है. पूरे गांव में यानी रास्ते व खाली जमीन में पानी आ चुका है. अब केवल लोगों के घरों में पानी प्रवेश करना बाकी है. स्थानीय लोग प्रशासन से 40 नाव की मांग कर रहे हैं. अब केवल एक फूट पानी बढ़ता है तो सभी घरों में पानी प्रवेश कर जायेगा. इससे 25 हजार से अधिक आबादी प्रभावित होगी.
