Patna News: पटना नगर निगम ने स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में बेहतर प्रदर्शन करते हुए देशभर के 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों में 16वां स्थान हासिल किया है. 37 मापदंडों पर हुए मूल्यांकन में शहर को 178 अंक मिले हैं, जबकि पिछले वर्ष पटना 164.5 अंकों के साथ 27वें पायदान पर था. इस बार पहली बार आयोजित वार्ड स्तरीय मूल्यांकन में भी पटना ने बाजी मारी है.
निगम के वार्ड 9 व वार्ड 43 ने राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है. उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दोनों वार्डों को कुल 40 लाख रुपये की पुरस्कार राशि मिली है. इस पर मेयर सीता साहू और नगर आयुक्त यशपाल मीणा ने कहा कि पुरस्कार की राशि का उपयोग संबंधित वार्डों में हरियाली बढ़ाने, पौधारोपण व वायु प्रदूषण नियंत्रण के कार्यों पर किया जायेगा.
30 हजार से अधिक आबादी में वार्ड 43 बना बिहार में नंबर वन
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पहली बार वार्ड स्तरीय मूल्यांकन तीन अलग-अलग श्रेणियों में हुआ. श्रेणी-1 (30 हजार से अधिक आबादी) में बांकीपुर अंचल के वार्ड संख्या-43 ने पूरे बिहार में पहला स्थान हासिल किया. इस उपलब्धि के लिए पटना नगर निगम को 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी गयी है. निगम प्रशासन इस पूरी राशि का इस्तेमाल राजेंद्र नगर, महमूदी चक, मैला टंकी रोड, आर्य कुमार रोड व पाटलिपुत्र पथ जैसे इलाकों में वायु प्रदूषण कम करने और पर्यावरण सुधार से जुड़ी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए करेगा.
श्रेणी-2 में वार्ड 9 ने राष्ट्रीय स्तर पर टॉप 9 में बनायी जगह
10 हजार से 30 हजार की आबादी वाली श्रेणी-2 में पाटलिपुत्र अंचल के वार्ड संख्या-9 ने राज्य में पहला स्थान पाने के साथ-साथ देश के शीर्ष 9 वार्डों में अपनी जगह बनायी. इस सफलता पर निगम को 15 लाख रुपये का पुरस्कार मिला है. इस बजट का प्रयोग एयरपोर्ट रोड, राजवंशी नगर, हार्डिंग रोड व कौशल नगर क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण और हरियाली बढ़ाने के लिए होगा. वहीं, श्रेणी-3 (10 हजार से कम आबादी) में पटना का कोई वार्ड शामिल नहीं हो सका, क्योंकि निगम के सभी वार्डों की जनसंख्या निर्धारित सीमा से अधिक है.
सफाई, पौधारोपण व वेस्ट मैनेजमेंट के मानकों पर मिली सफलता
दोनों वार्डों की सफलता वायु गुणवत्ता सुधार से जुड़े कड़े मानकों पर बेहतर प्रदर्शन का नतीजा है. मूल्यांकन के दौरान सड़कों के किनारे सघन पौधारोपण, नियमित घर-घर कचरा संग्रहण, मैकेनाइज्ड स्वीपिंग मशीनों से सड़कों की धूल सफाई और निर्माण-विध्वंश अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को देखा गया. साथ ही बेहतर सड़क व्यवस्था, स्वच्छता और जन-जागरूकता अभियानों के बल पर पटना ने यह मुकाम हासिल किया है.
