32.77 हेक्टेयर में बन रहा है मेट्रो का कमांड सेंटर, पटना वासियों को मिलेगा सुरक्षित और स्मार्ट सफर

Patna Metro :  पटना मेट्रो प्रोजेक्ट अब सिर्फ ट्रैक और स्टेशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे खड़ा हो रहा है एक अत्याधुनिक ‘कमांड सेंटर’, जो पूरे सिस्टम का दिमाग होगा. 32.77 हेक्टेयर में फैला यह डिपो न केवल ट्रेनों के रखरखाव और जांच का केंद्र बनेगा, बल्कि यहीं से पूरे मेट्रो नेटवर्क की निगरानी और संचालन होगा.

Patna Metro : पटना के पब्लिक ट्रांसपोर्ट के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. राजधानी पटना के भविष्य को स्मार्ट और तेज बनाने के लिए पटना मेट्रो का डिपो, जिसे मेट्रो का ‘कमांड सेंटर’ कहा जा रहा है, अब पूरी भव्यता के साथ आकार ले रहा है.

32.77 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला यह सेंटर सिर्फ मेट्रो ट्रेनों के खड़े होने की जगह नहीं है, बल्कि यह वह पावर हाउस है जहां से पूरे शहर के मेट्रो नेटवर्क की हर हलचल पर पैनी नजर रखी जाएगी. यहां तकनीक और सुरक्षा का तालमेल देखने को मिलेगा.

यहां से कंट्रोल होगी पटना मेट्रो की धड़कन

पटना मेट्रो का यह डिपो मुख्य कमांड सेंटर को मेट्रो नेटवर्क का ‘ब्रेन’ कहा जा रहा है. यहां लगी विशाल स्क्रीन और सेंसर्स के जरिए अधिकारी यह देख सकेंगे कि कौन सी ट्रेन किस स्टेशन पर है और उसकी स्पीड क्या है.

किसी भी आपातकालीन स्थिति में यहीं से ट्रेन को दिशा-निर्देश दिए जाएंगे. यह सुनिश्चित करेगा कि पटना के नागरिकों का सफर न केवल तेज हो, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित रहे.

हाई-टेक वर्कशॉप

सुरक्षा के मामले में पटना मेट्रो कोई समझौता नहीं करने वाली है. डिपो के भीतर 739 मीटर लंबा एक विशेष ‘टेस्ट ट्रैक’ तैयार किया गया है. मुख्य ट्रैक पर यात्रियों को लेकर निकलने से पहले हर ट्रेन को इस अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा, जहां उसकी परफॉर्मेंस और सेफ्टी फीचर्स की बारीकी से जांच होगी.

इसके साथ ही विश्वस्तरीय वर्कशॉप में मशीनों के जरिए मेट्रो ट्रेनों के नट-बोल्ट से लेकर जटिल सर्किट तक का एक्स-रे किया जाएगा. 8 स्टेबलिंग लाइनें बनाई गई हैं, जहां दिन भर की दौड़-भाग के बाद मेट्रो ट्रेन रात को विश्राम करेंगी और अगले दिन के लिए खुद को तैयार करेंगी.

रोबोटिक वाशिंग प्लांट

सफर के आनंद को बढ़ाने के लिए स्वच्छता का भी खास ख्याल रखा गया है. डिपो में एक ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट लगाया गया है, जो किसी जादू से कम नहीं है. जैसे ही ट्रेन इस प्लांट से गुजरेगी, सेंसर आधारित ब्रश और पानी की बौछारें चंद मिनटों में उसे चमचमाता हुआ बाहर निकाल देंगी.

इसके अलावा सफाई के लिए अलग से हैवी क्लीनिंग सिस्टम भी मौजूद है. यह डिपो पटना के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि यह एक आधुनिक और स्मार्ट जीवनशैली की ओर बढ़ता बिहार का मजबूत कदम है.

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लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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