Bijli Vibhag Rishwat Case : नवादा जिले के नारदीगंज थाना क्षेत्र के हंडिया गांव में बिजली विभाग को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. गांव के लोगों ने विभाग के कनीय अभियंता और एक कर्मी पर रिश्वत लेने और काम अधूरा छोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है. मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है. इस घटना के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है और लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बिजली सुविधा बहाल करने के नाम पर विभाग के अधिकारियों ने पहले दो लाख रुपये की मांग की थी. बाद में बातचीत के बाद यह राशि डेढ़ लाख रुपये पर तय हुई. इसके बाद गांव के गरीब किसानों और मजदूरों ने आपस में चंदा जुटाकर एक लाख रुपये इकट्ठा किया और संबंधित कर्मियों को दे दिया. लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही गांव में बिजली की सुविधा शुरू हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
Nardiganj News : तीन महीने बाद भी अधूरा पड़ा काम
ग्रामीणों के अनुसार, रुपये लेने के बाद विभाग की ओर से केवल पंडपा गांव तक ही बिजली के पोल लगाए गए. हंडिया गांव में न तो ट्रांसफार्मर लगाया गया और न ही तार बिछाया गया. इस बात को लेकर अब करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है. इससे गांव के लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
ग्रामीण कृष्णदेव सिंह, नवल सिंह, नरेश सिंह और महेश कुमार समेत कई लोगों ने बताया कि बार-बार कहने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि पैसे लेने के बावजूद काम अधूरा छोड़ दिया गया, जो साफ तौर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार को दर्शाता है.
विरोध करने पर मिली धमकी का आरोप
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि 25 जुलाई को जब उन्होंने अधिकारियों से इस बारे में सवाल किया तो उन्हें बिजली नहीं देने की धमकी दी गई. इतना ही नहीं, विरोध करने पर अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच कहासुनी भी हुई. ग्रामीणों का कहना है कि इस दौरान पुलिस की मौजूदगी में भी विवाद हुआ.
सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि बाद में कनीय अभियंता ने ही ग्रामीणों के खिलाफ थाने में झूठा मामला दर्ज करा दिया, जिससे गांव के लोग और ज्यादा परेशान हो गए हैं.
जेई ने आरोपों को बताया बेबुनियाद
वहीं दूसरी ओर, बिजली विभाग के कनीय अभियंता नवीन कुमार सिंह ने ग्रामीणों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है. उनका कहना है कि विभाग पर लगाए जा रहे आरोप गलत हैं और वास्तविकता इससे अलग है.
जांच की मांग, कार्रवाई का इंतजार
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि अगर समय रहते न्याय नहीं मिला तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे.
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और ग्रामीणों को कब तक राहत मिलती है. फिलहाल गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है और लोग जल्द कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
