मुहर्रम पर 24 घंटे ब्लैकआउट रहा शहर

बिजली विभाग के खिलाफ परेशान लोगों का फूटा गुस्सा

बिजली विभाग के खिलाफ परेशान लोगों का फूटा गुस्सा

प्रतिनिधि, नवादा नगर.

इस बार भी मुहर्रम पर्व के दौरान नवादा शहर में बिजली विभाग ने करीब 24 घंटे तक बिजली आपूर्ति बंद कर दी, जिससे शहरवासियों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा. गर्मी और उमस भरे मौसम में अचानक बिजली कटौती ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया. इसको लेकर सोमवार को सोशल मीडिया पर लोगों का आक्रोश फूट पड़ा. इसके लिए किसी ने बिजली विभाग को जिम्मेदार ठहराया, तो किसी ने जिला प्रशासन व शांति समिति को आड़े हाथों लिया. रविवार की रात करीब 11 बजे शहर की बिजली आपूर्ति ठप कर दी गयी. सोमवार को दिनभर बिजली गुल रही और केवल एक घंटे के लिए अस्थायी रूप से आपूर्ति बहाल की गयी. उसके बाद मंगलवार की रात लगभग 12:30 बजे बिजली वापस आयी. यानी कुल मिलाकर करीब 25 घंटे तक शहर अंधेरे में डूबा रहा.

बिजली कटौती से परेशान नवादा के नागरिकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की. विक्रम कुमार ने व्यंग्य करते हुए लिखा के मुर्दों को रोशनी और इंसानों का अंधेरा. त्रिवेणी कुमार ने टिप्पणी की कि बिजली पर हर नागरिक का हक है, त्योहार के नाम पर आमजन को अंधेरे में रखना कहां की समझदारी है. अधिवक्ता निरंजन कुमार ने फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लिखा कि जिलाधिकारी महोदय मुहर्रम के समय पूरा नवादा शहर एक ब्लैकआउट जोन जैसा दिख रहा है, क्या यही व्यवस्था है.

बिजली कटौती से व्यापक नुकसान

तेज गर्मी के बीच बिजली नहीं रहने से सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को हुई. एक गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ गयी, जिन्हें बिना पंखे और लाइट के रातभर तड़पना पड़ा. इसके साथ ही व्यवसायियों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा. कई दवा दुकानदारों की ताप-संवेदनशील दवाएं खराब हो गयीं, तो आइसक्रीम फैक्ट्रियों और दुकानों में स्टॉक पिघल जाने से लाखों रुपये का नुकसान हुआ.

बिजली विभाग पर उठे सवाल

लोगों का कहना है कि जब बिजली विभाग पहले ही ग्रिड सुधार या मेंटेनेंस के नाम पर अलग-अलग दिन में चार से 12 घंटे तक बिजली की कटौती करता है, तो फिर पर्व के दिन पूरे शहर की बिजली काट देना असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा है. अगर, सुरक्षा कारणों से बिजली काटना भी जरूरी हो, तो कम-से-कम आंशिक कटौती की योजना बनायी जा सकती है. ताकि, आवश्यक सेवाएं और आमजन प्रभावित नहीं हों. शांति समिति और प्रशासन की ओर से इस विषय में किसी वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी भी सार्वजनिक नहीं की गयी है. इससे आम नागरिकों में नाराजगी और गहरी हो गयी है.

जनता की मांग, हो स्थायी समाधान

नवादा के जागरूक नागरिकों ने प्रशासन और बिजली विभाग से मांग की है कि धार्मिक अवसरों पर बिजली कटौती को लेकर एक पारदर्शी और संतुलित नीति तैयार की जाये. तकनीक के इस युग में पूरे शहर को अंधेरे में रखना न तो व्यावहारिक है और न ही न्याय संगत. आम लोगों की सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रख भविष्य में ऐसी कटौती से बचा जाना चाहिए.

क्या कहते हैं लोग

कोई भी पर्व के दौरान प्रतिमा या ताजिया की ऊंचाई को लेकर एक मानक तय किया जाना चाहिए और शहर में तारों को व्यवस्थित किया जाना चाहिए. लोग छह-सात घंटे की बिजली कटौती सह सकते हैं, लेकिन 24 घंटे की नहीं. बिजली विभाग को भी वायर को ऊंचा करना चाहिए.

विक्रम कुमार, व्यवसायी

यदि नवादा जिला प्रशासन और बिजली विभाग में समन्वय होता, तो पर्वों पर बिजली कटौती की जरूरत नहीं पड़ती. एसओपी बनाकर ताजिया या मूर्ति की ऊंचाई तय की जानी चाहिए. 11 हजार वोल्ट तारों को कवर करना वर्षों से लंबित है. इसमें सुधार की आवश्यकता है.

ब्रजेश राय, दवा विक्रेता संघ, मगध जोन संगठन सचिव

जिस स्थान पर कार्यक्रम आयोजित हो, केवल वहीं की बिजली काटी जानी चाहिए. मेरी फैक्ट्री में करीब डेढ़ लाख रुपये के आइसक्रीम पिघल गये, जिससे भारी नुकसान हुआ है. बिजली विभाग को ऐसी स्थिति से बचाव के लिए ठोस और जिम्मेदार कदम उठाना चाहिए.

उत्तम बरियाल, व्यापारी

क्या कहते हैं पदाधिकारी

बैठक में यह तय हुआ था कि छह जुलाई की रात से सुबह 10 बजे तक सभी ताजिया बुंदेलाबागी पहुंच जायेगा, ताकि बिजली व्यवस्था बाधित नहीं हो. लेकिन, समय का पालन नहीं हुआ. सुरक्षा कारणों से बिजली काटी गयी. अब इसका समाधान जल्द निकाला जायेगा.

अनिल कुमार भारती, कार्यपालक अभियंता नवादाB

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By Vishal kumar

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