नवादा में सकरी नदी का कहर, काम के लिए मजदूरों को करना पड़ता है घंटों इंतजार; बाजार जाने के लिए 18 किमी का चक्कर

नवादा में सकरी नदी के उफान पर आने से गोविंदपुर के आस-पास के गांवों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खासकर रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों को काम पर जाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, और कई बार उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है।

Sakri River : नवादा के गोविंदपुर में भादो की शुरुआत में ही सकरी नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी के उस पार बसे गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है. रविवार को हुई बारिश के बाद पहाड़ी इलाकों से आया पानी सकरी नदी में पहुंच गया, जिससे नदी अचानक उफान पर आ गई. तेज बहाव के कारण नदी पार करना मुश्किल हो गया है. सोमवार को रोजी-रोजगार की तलाश में कई मजदूर काफी देर तक नदी किनारे खड़े रहे, लेकिन पानी का बहाव कम नहीं हुआ तो उन्हें निराश होकर वापस घर लौटना पड़ा.

सकरी नदी के दूसरी ओर महावरा, सरकंडा, पिपरा, देल्हुआ और शेखोपुर गांव बसे हैं. सावन के महीने में नदी का जलस्तर सामान्य रहने के कारण इन गांवों के लोगों का गोविंदपुर बाजार और प्रखंड मुख्यालय से संपर्क बना हुआ था. लेकिन भादो में अचानक पानी बढ़ने के बाद अब लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है.

सकरी नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर

रोज कमाने-खाने वालों के सामने रोजगार का संकट

महावरा गांव निवासी साबिर खान, फरीद खान और बबलू मियां राजमिस्त्री का काम करते हैं. गांव के कई अन्य लोग भी राजमिस्त्री और दैनिक मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि उनका काम और रोजमर्रा की जरूरतें काफी हद तक गोविंदपुर बाजार से जुड़ी हैं.

महावरा से सकरी नदी पार कर गोविंदपुर बाजार की दूरी महज ढाई से तीन किलोमीटर है. नदी में पानी नहीं रहने पर ग्रामीण पैदल ही नदी पार कर आसानी से बाजार पहुंच जाते हैं. लेकिन इस समय तेज बहाव के बीच नदी पार करना जोखिम भरा हो गया है.

पानी का स्तर कम होने की उम्मीद में मजदूर

सोमवार को कई मजदूर इस उम्मीद में नदी किनारे पहुंचे थे कि शायद पानी का स्तर कुछ कम हो जाए और बहाव धीमा पड़ने पर वे गोविंदपुर बाजार जाकर काम कर सकें. काफी देर इंतजार के बाद भी नदी का बहाव कम नहीं हुआ. आखिरकार मजदूर निराश होकर वापस महावरा लौट गए.

18 किलोमीटर घूमकर बाजार पहुंचने की मजबूरी

सकरी नदी में पानी बढ़ने के बाद ग्रामीणों के पास गोविंदपुर बाजार जाने के लिए फिलहाल झारखंड होकर जाने का विकल्प है. इस रास्ते से करीब 18 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है. साथ ही एक व्यक्ति को करीब 50 रुपये किराया भी खर्च करना पड़ता है.

जिन ग्रामीणों के पास दोपहिया वाहन हैं, वे किसी तरह झारखंड के रास्ते गोविंदपुर बाजार पहुंच रहे हैं. लेकिन जिन लोगों के पास अपना वाहन नहीं है, उनके लिए अतिरिक्त 18 किलोमीटर का सफर और किराया वहन करना आसान नहीं है. इसका सीधा असर मजदूरों की रोजी-रोटी पर पड़ रहा है.

दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों की बढ़ी मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि दैनिक मजदूरी करने वाले परिवारों के लिए एक दिन भी काम नहीं मिलना आर्थिक परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है. अगर नदी में बाढ़ की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो रोजगार के साथ-साथ रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए भी लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

पुल बनने के बाद खत्म होगी नदी पार करने की परेशानी

गौरतलब है कि सकरी नदी पर पुल निर्माण का काम चल रहा है. निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है और पुल के कई पिलर भी खड़े हो चुके हैं. हालांकि, पुल का निर्माण पूरा होने में अभी कुछ समय लगेगा.

ग्रामीणों को उम्मीद है कि पुल का निर्माण पूरा होने के बाद नदी के उस पार बसे गांवों का गोविंदपुर प्रखंड मुख्यालय और बाजार से सीधा संपर्क हो जाएगा. बारिश के दिनों में भी लोगों को आवागमन के लिए नदी के जलस्तर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

पुल बनने से राहत मिलने की उम्मीद

पुल बनने के बाद मजदूरों के साथ किसानों, विद्यार्थियों और अन्य ग्रामीणों को भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. फिलहाल सकरी नदी का बढ़ा जलस्तर ग्रामीणों के लिए रोजी-रोजगार और आवागमन दोनों के सामने चुनौती बना हुआ है.

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By Prabhat khabar news desk

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