Nawada News : सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अकबरपुर में सोमवार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) का आयोजन किया गया. अभियान के दौरान स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति कुमारी ने कुल 250 गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की. जांच के दौरान 26 महिलाओं को उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था (एचआरपी) के रूप में चिन्हित किया गया. वहीं, पांच गर्भवती महिलाओं को आयरन की कमी दूर करने के लिए एफसीएम उपचार दिया गया.
गर्भवती महिलाओं को खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी
अभियान के दौरान गर्भवती महिलाओं की आवश्यक स्वास्थ्य जांच के साथ उन्हें गर्भावस्था के दौरान खान-पान, नियमित स्वास्थ्य जांच और आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी दी गयी. स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह की परेशानी होने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए महिलाओं को जागरूक किया.
स्वास्थ्यकर्मियों ने निभायी महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम में स्वास्थ्य प्रबंधक विजय पासवान, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक देव शंकर, आरएमएनसीएचए काउंसलर रामप्रवेश कुमार सहित एएनएम और जीएनएम मौजूद रहीं. पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि मंतोष कुमार ने कार्यक्रम के संचालन में तकनीकी सहयोग प्रदान किया.
26 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं की होगी नियमित निगरानी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अभियान के दौरान चिन्हित सभी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी की जाएगी. उन्होंने बताया कि सभी चिन्हित महिलाओं को अनिवार्य रूप से 21 अगस्त को दोबारा जांच और अनुवर्ती उपचार के लिए बुलाया गया है. इसकी सूचना आशा फैसिलिटेटर और आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से संबंधित महिलाओं तक पहुंचायी जाएगी.
समय पर पहचान और उपचार से कम होगी मातृ-शिशु मृत्यु दर
डॉ. राजेश कुमार ने स्वास्थ्यकर्मियों को उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी, समय पर पुनः जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की समय पर पहचान, उचित उपचार और निरंतर निगरानी से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी कमी लायी जा सकती है.
हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की जल्द पहचान पीएमएसएमए का उद्देश्य
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान का मुख्य उद्देश्य उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की शीघ्र पहचान कर गर्भवती महिलाओं को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है. इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, जोखिम की पहचान और आवश्यक उपचार सुनिश्चित कर सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दिया जा रहा है.
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