नवादा से अमित सौरभ की रिर्पोट
Nawada News : खुले में शौच मुक्त समाज बनाने के उद्देश्य से लोहिया स्वच्छता अभियान के तहत रोह प्रखंड में बनाए गए लगभग 24 सामुदायिक शौचालय आज खुद बदहाली की पहचान बन गए हैं. कहीं इन भवनों पर हमेशा ताला लटका रहता है, तो कहीं पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोग उनका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. रखरखाव के अभाव में कई शौचालय जर्जर हो चुके हैं, जिससे सरकार के स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल उठने लगे हैं.
कहीं ताला, कहीं पानी नहीं, कई भवन खंडहर बने
रोह प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में बने अधिकांश सामुदायिक शौचालय उपयोग से बाहर हैं. कई स्थानों पर दरवाजे टूट चुके हैं, शौचालयों में गंदगी फैली हुई है और पानी की कोई व्यवस्था नहीं है. कुछ भवनों की दीवारों का उपयोग ग्रामीण गोईठा (उपला) सुखाने के लिए कर रहे हैं. जिन परिसरों से स्वच्छता का संदेश जाना था, वहीं अब उपेक्षा साफ दिखाई देती है.
शिकायत के बाद भी नहीं बदली स्थिति
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थानीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला. शौचालय बंद रहने के कारण कई लोगों को फिर खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है. इससे खुले में शौच मुक्त अभियान की सफलता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
केवल निर्माण नहीं, संचालन भी जरूरी
स्वच्छता से जुड़े लोगों का कहना है कि सामुदायिक शौचालय बनाना ही पर्याप्त नहीं है. नियमित साफ-सफाई, पानी की उपलब्धता, बिजली और रखरखाव की व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है. यदि इन सुविधाओं का संचालन नहीं होगा तो लाखों रुपये की सरकारी राशि से निर्मित परिसंपत्तियां बेकार साबित होंगी.
सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत में अंतर
सरकारी रिकॉर्ड में योजना सफल दिखाई देती है, लेकिन धरातल पर अधिकांश सामुदायिक शौचालय अपनी उपयोगिता खो चुके हैं. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या केवल भवन निर्माण कर देना ही किसी योजना की सफलता का प्रमाण माना जा सकता है.
क्या बोले अधिकारी?
प्रखंड स्वच्छता समन्वयक ने कहा कि सामुदायिक शौचालयों की स्थिति की जानकारी ली जा रही है. जहां पानी, साफ-सफाई या रखरखाव की समस्या है, वहां जांच कर संबंधित पंचायतों और कार्य एजेंसी को आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया जाएगा. बंद पड़े शौचालयों को चालू कराने और नियमित संचालन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा.
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से सभी सामुदायिक शौचालयों का सर्वे कराने, पानी की स्थायी व्यवस्था करने, नियमित सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करने तथा जवाबदेही तय करने की मांग की है. उनका कहना है कि स्वच्छता अभियान तभी सफल होगा, जब बनाई गई सुविधाएं वास्तव में लोगों के उपयोग में आएंगी.
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