Nawada News: नवादा से मनोज मिश्रा की रिपोर्ट. नवादा. संकटमोचन मंदिर और हजरत सैयद शाह जलालुद्दीन बुखारी का मजार साम्प्रदायिक सौहार्द का प्रतीक है. गंगा-जमुनी परम्परा का प्रतीक बाबा की मजार व हनुमान मंदिर के प्रति आम लोगों की आस्था हालिया दिनों में बढ़ती ही जा रही है. पटना-रांची मुख्य मार्ग पर नवादा में एक साथ यह धरोहर स्थित है. दोनों धार्मिक स्थलों की दीवार एक-दूसरे से सटी है. जुमेरात यानी गुरुवार को कुछ कम तो जुम्मा यानी शुक्रवार को बाबा की मजार भारी भीड़ उमड़ती है, जबकि प्रत्येक मंगलवार व शनिवार को हनुमान मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ जुटती है.
लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है मंदिर
जिले के अलावा आसपास के कई जिलों के लोगों के मन मंदिर में संकट मोचन मंदिर बसता है. संकट मोचन मंदिर कई दशकों से लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. कोई शुभ कार्य हो, नयी गाड़ी खरीदनी हो या चुनाव में नामांकन करवाया हो, लोग पहले संकट मोचन के दरबार में माथा टेकते हैं. मंगलवार और शनिवार के अलावा रामनवमी के दिन तो यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है. महंत बाबा नकुल देव उदासीन तथा पुजारी नारायण देव उदासीन बताते हैं कि संकट मोचन मंदिर में मौजूद हनुमान जी की प्रतिमा करीब 42 साल पहले स्थापित की गयी थी. जब प्रतिमा स्थापित की गई थी तब यहां सुनसान था. सड़क से काफी नीचे खाईनुमा जगह पर प्रतिमा स्थापित की ग दिन तक प्रतिमा खुले में विराजमान रही. वर्तमान में हर सप्ताह 10 हजार से अधिक लोग मंदिर पहुंचते हैं. यहां संकट मोचन मंदिर से सटा हुआ लक्ष्मी नारायण मंदिर भी है.
