Nawada News(कुमार मनीष देव): नवादा जिले के रजौली थाना क्षेत्र अंतर्गत सुदूरवर्ती सवैयाटांड़ पंचायत में अभ्रक माफियाओं के सिंडिकेट के खिलाफ वन विभाग ने एक बड़ी और कड़क कार्रवाई की है. दैनिक गश्त और छापेमारी के दौरान वनकर्मियों की टीम ने बसरौन गांव स्थित प्रतिबंधित अभ्रक खदान से अवैध उत्खनन कर ले जा रहे एक पिकअप वाहन को फिल्मी अंदाज में खदेड़कर दबोच लिया. जांच करने पर उक्त वाहन से कुल 20 बोरी उच्च गुणवत्ता का अवैध अभ्रक (माइका) बरामद किया गया है. डीएफओ नवादा के कड़े निर्देश पर इस काले कारोबार में संलिप्त माफियाओं के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है.
जंगल में सुरक्षा गश्त के दौरान रंगेहाथ पकड़े गए खनन माफिया
पूरी कार्रवाई की विस्तृत जानकारी देते हुए रजौली के रेंजर नारायण लाल सेवक ने बताया कि वनकर्मी जंगली और पर्वतीय क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर लगातार सघन गश्त (पेट्रोलिंग) कर रहे थे. इसी क्रम में टीम जब बसरौन स्थित अभ्रक खदान के समीप पहुंची, तो वहां कुछ लोग अवैध रूप से पहाड़ों को काटकर खनन करते हुए दिखाई दिए. वनकर्मियों की आहट पाते ही अभ्रक को बोरों में पैक कर पिकअप पर लोड कर रहे तस्करों के बीच हड़कंप मच गया और वे वाहन को छोड़कर जंगल की सघन झाड़ियों का फायदा उठाकर इधर-उधर भागने लगे.
कीचड़ में फंसा पिकअप, सवैयाटांड़ पंचायत के मुखिया के घर के पास से हुआ जब्त
इसी बीच एक शातिर युवक ने चालाकी दिखाते हुए अभ्रक लदे पिकअप वाहन को स्टार्ट किया और उसे बेहद तेज रफ्तार में भगाते हुए सवैयाटांड़ पंचायत के वर्तमान मुखिया नारायण सिंह के आवासीय घर के समीप ले जाकर छुपा दिया. इसकी पुख्ता सूचना मिलते ही रजौली रेंज कार्यालय से भारी संख्या में वनकर्मी और स्थानीय पुलिस बल के जवान मौके पर पहुंचे. संयुक्त टीम ने मुखिया के घर के पास से अभ्रक लदे पिकअप वाहन को विधिवत जब्त कर लिया. हालांकि, क्षेत्र में हुई बारिश के कारण रास्ते में भयंकर कीचड़ जमा था, जिसमें पिकअप फंस गया. इसे कड़ी मशक्कत और ट्रैक्टर के सहारे खींचकर रजौली रेंज कार्यालय लाने में वनकर्मियों को पसीने छूट गए.
एक दशक से चल रहा है अवैध खेल, राजस्व को लग रहा है करोड़ों का चूना
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो सवैयाटांड़ पंचायत पिछले एक दशक से अभ्रक के अवैध काले साम्राज्य के लिए पूरे सूबे में कुख्यात है. पंचायत के चटकरी गांव स्थित बंद पड़ी शारदा अभ्रक माइंस, हनुमंती खदान, ललकी खदान और बसरौन खदान समेत दर्जनों ऐसे पॉइंट हैं, जहां अभ्रक माफियाओं द्वारा बीते दस वर्षों से धड़ल्ले से अवैध उत्खनन का खेल जारी है. इस अवैध धंधे से बिहार सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के वैध राजस्व (रॉयल्टी) का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों का यह भी संगीन आरोप है कि वन विभाग द्वारा समय-समय पर की जाने वाली यह कार्रवाई महज खानापूर्ति होती है, जिससे माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हो रहे हैं.
भारतीय वन अधिनियम के तहत दर्ज हुई प्राथमिकी, तस्करों की गिरफ्तारी जल्द: डीएफओ
इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए डीएफओ नवादा श्रेष्ठ कुमार कृष्ण ने बताया कि जब्त पिकअप से कुल 20 बोरी अवैध अभ्रक की खेप बरामद हुई है, जिसे वन डिपो में सुरक्षित रखवा दिया गया है. आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर अवैध उत्खनन में जुटे और सरकारी संपत्ति की चोरी करने वाले सभी चिन्हित लोगों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम की सुसंगत और कड़ी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है. रेंजर नारायण लाल सेवक ने कहा कि इस रैकेट के पीछे सक्रिय मुख्य माफियाओं के बारे में कई गुप्त और विस्तृत जानकारियां हाथ लगी हैं, उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस के सहयोग से अग्रतर कानूनी कार्रवाई तेजी से जारी है.
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