नवादा का सिमरातरी गांव 5 दिनों से अंधेरे में: पेड़ गिरने से टूटे बिजली के 5 खम्भे, बूंद-बूंद पानी को तरसे लोग

Nawada News: रजौली प्रखंड के सवैयाटाड़ पंचायत अंतर्गत सिमरातरी गांव में पिछले पांच दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप है. विद्यालय के पास विशाल पेड़ गिरने से बिजली के 5 खम्भे टूटे. पानी का संकट गहराया. बीडीओ संजीव कुमार झा ने दिया जल्द बहाली का आश्वासन. पढ़ें रिपोर्ट.

Nawada News (कुमार मनीष देव): नवादा जिले के रजौली प्रखंड क्षेत्र से भीषण गर्मी के बीच एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी जन-समस्या की खबर सामने आ रही है. रजौली प्रखंड के अंतर्गत सुदूर सवैयाटाड़ पंचायत के सिमरातरी गांव में पिछले पांच दिनों से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है. चिलचिलाती धूप और रिकॉर्ड तोड़ उमस के बीच पिछले 120 घंटों से पूरा गांव पूरी तरह ब्लैकआउट (अंधेरे) में डूबा हुआ है. बिजली न रहने के कारण ग्रामीणों का पूरा दैनिक जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और गांव में बिजली के साथ-साथ अब पानी का भी भीषण हाहाकार मच गया है.

स्कूल के पास गिरा था भारी-भरकम पेड़, एक साथ ताश के पत्तों की तरह ढह गए बिजली के 5 पोल

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी समस्या पांच दिन पहले शुरू हुई थी जब मौसम के मिजाज के बीच एक बड़ा हादसा हुआ. सिमरातरी गांव में स्थित स्थानीय विद्यालय के समीप एक विशाल और पुराना पेड़ अचानक जड़ से उखड़कर मुख्य सड़क पर गिर गया. पेड़ की चपेट में आने से वहां खड़ी एक पैसेंजर टेम्पो पूरी तरह चकनाचूर होकर क्षतिग्रस्त हो गई. इसी पेड़ के वजन और झटके के कारण हाई-टेंशन लाइन गुजारने वाले बिजली के 5 भारी खम्भे (पोल) भी ताश के पत्तों की तरह टूटकर जमीन पर आ गिरे, जिससे पूरे इलाके का पावर ग्रिड फेल हो गया.

मोटर बंद होने से बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, बिहार-झारखंड के विभागीय पेच में फंसा समाधान

ग्रामीणों का कहना है कि लगातार पांच दिनों से बिजली गुल होने के कारण सबसे बड़ा संकट पीने के पानी का खड़ा हो गया है. बिजली से चलने वाली मोटरें बंद पड़ी हैं, जिसके कारण सरकार की ड्रीम स्कीम ‘हर घर नल-जल योजना’ के तहत मिलने वाली जलापूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है. घरों में मोबाइल चार्जिंग बंद है, बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो चुकी है और गृहिणियों के सारे दैनिक कार्य ठप हैं. सबसे बड़ा खौफ रात के अंधेरे में जंगलों से निकलने वाले सांप और बिच्छुओं का बना हुआ है, जिससे डरे लोग रतजगा करने को मजबूर हैं.

ग्रामीणों ने एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा खुलासा करते हुए बताया कि इस समस्या के जल्द न सुधरने के पीछे एक बड़ा प्रशासनिक और भौगोलिक पेच फंसा हुआ है. दरअसल, सवैयाटाड़ पंचायत की बिजली आपूर्ति सीधे बिहार बिजली बोर्ड से नहीं जुड़ी है. बिहार और झारखंड बिजली विभाग के बीच हुए एक पुराने द्विपक्षीय समझौते के तहत इस सीमावर्ती क्षेत्र में बिजली की लाइव सप्लाई झारखंड राज्य से की जाती है, जबकि इसका पूरा सरकारी राजस्व (बिल) बिहार के रजौली बिजली कार्यालय में जमा किया जाता है. इसी दो राज्यों की तकनीकी और कागजी व्यवस्था के कारण ग्राउंड पर काम शुरू होने में काफी विलंब हो रहा है, जिससे ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है.

प्रखंड विकास पदाधिकारी ने संभाली कमान, जल्द बिजली बहाली का दिया भरोसा

इस पूरे गंभीर मामले और ग्रामीणों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए रजौली के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) संजीव कुमार झा तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं. उन्होंने आधिकारिक तौर पर बताया कि प्रखंड प्रशासन द्वारा बिजली विभाग के वरीय अभियंताओं को इस दुर्घटना और 5 पोल टूटने की लिखित सूचना दे दी गई है. बीडीओ ने सिमरातरी के लोगों को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि बहुत जल्द विभागीय स्तर पर बड़ी क्रेन भेजकर गिरे हुए विशाल पेड़ को सड़क से हटवाया जाएगा और युद्ध स्तर पर नए बिजली के खम्भे खड़े करवाकर तार जोड़ने का काम शुरू कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारियों से को-ऑर्डिनेशन किया जा रहा है ताकि बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल हो सके. बहरहाल, जब तक सरकारी अमला धरातल पर काम पूरा नहीं करता, तब तक सिमरातरी गांव के लोग इस भीषण गर्मी में मोमबत्ती और ढिबरी (लालटेन) के सहारे रातें काटने को मजबूर हैं.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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