नवादा से आशुतोष कुमार की रिपोर्ट
Nawada News : त्वरित अनुसंधान, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन के दम पर नवादा पुलिस ने एक बार फिर स्पीडी ट्रायल में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. अवैध हथियार रखने के मामले में सदर न्यायालय ने अभियुक्त को दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के कारावास सहित अर्थदंड की सजा सुनाई है. यह फैसला अपराधियों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि सशक्त अनुसंधान और समयबद्ध चार्जशीट के सामने कानून से बच निकलना आसान नहीं है.
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी का सख्त फैसला
जानकारी के अनुसार, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, सदर न्यायालय नवादा ने रजौली थाना कांड संख्या 545/24 में सुनवाई पूरी करते हुए ग्राम गगन खुर्द, थाना रजौली निवासी उमा यादव उर्फ उमाशंकर यादव को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी) ए के तहत तीन वर्ष के कारावास एवं तीन हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई.
जुर्माना नहीं देने पर बढ़ेगी सजा
जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. वहीं धारा-26 के तहत एक वर्ष के कारावास एवं दो हजार रुपये जुर्माना की भी सजा सुनाई गई है. जुर्माना अदा नहीं करने पर इस धारा में भी एक माह का अतिरिक्त कारावास निर्धारित किया गया है. पुलिस के अनुसार, 17 नवंबर 2024 को रजौली थाना पुलिस ने गगन खुर्द स्थित अभियुक्त के घर की विधिसम्मत तलाशी ली थी. इस दौरान दो देसी कट्टे, एक जिंदा कारतूस, तीन खोखा तथा एक देसी शॉर्ट गन बरामद किए गए थे. बरामदगी के आधार पर रजौली थाना में कांड संख्या 545/24 दर्ज कर आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी.
मजबूत चार्जशीट और प्रभावी पैरवी से आर्म्स एक्ट में मिली दोषसिद्धि
मामले के अनुसंधान के दौरान नवादा पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान, ह्यूमन इंटेलिजेंस, गवाहों के बयान तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का गहन विश्लेषण करते हुए समय सीमा के भीतर न्यायालय में मजबूत चार्जशीट समर्पित की. इसी का परिणाम रहा कि स्पीडी ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में सफल रहा. मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अभियोजन पदाधिकारी रवि प्रकाश ने प्रभावी पैरवी की. न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों एवं गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.
स्पीडी ट्रायल से त्वरित न्याय पर नवादा पुलिस का जोर
नवादा पुलिस ने इसे आम जनता को त्वरित न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अपराधियों के विरुद्ध वैज्ञानिक अनुसंधान, सशक्त साक्ष्य संकलन और प्रभावी अभियोजन की रणनीति आगे भी इसी प्रकार जारी रहेगी, ताकि अपराधियों को शीघ्र सजा दिलाकर कानून के राज को और मजबूत किया जा सके.
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