नवादा के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल का बुरा हाल, सिविल सर्जन के सामने रो पड़ीं महिला कर्मी, वेतन रुकने पर भारी बवाल

Nawada News: रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी के औचक निरीक्षण के दौरान फूटा भारी गुस्सा. मरीज को एक्सपायरी दवा देने और जीएनएम नर्सों का मई महीने का वेतन रोकने पर हुआ हंगामा. जांच कमेटी गठित. पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

Nawada News (कुमार मनीष देव): नवादा जिले के रजौली अनुमंडलीय अस्पताल में इन दिनों सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी और आंतरिक प्रशासनिक तालमेल पूरी तरह पटरी से उतर चुका है. इस बात का बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला पर्दाफाश तब हुआ, जब नवादा के सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी खुद अस्पताल की जमीनी हकीकत का जायजा लेने और औचक निरीक्षण करने पहुंचे. सिविल सर्जन के इस औचक दौरे के दौरान अस्पताल के भीतर चल रही भारी अव्यवस्था, घोर प्रशासनिक लापरवाही, महिला कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न और मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ के कई गंभीर मामले एक साथ लाइव खुलकर सामने आ गए हैं, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे को हिलाकर रख दिया है.

गर्भवती महिलाओं की हुई जांच, 22 महिलाओं में मिली अत्यधिक खून की कमी

अस्पताल पहुंचे सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी ने आधिकारिक तौर पर बताया कि वे मुख्य रूप से अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत आयोजित विशेष स्वास्थ्य शिविर की मुस्तैदी का निरीक्षण करने आए थे. इस विशेष शिविर के दौरान सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आईं कुल 152 गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य की गहन चिकित्सकीय जांच की गई. जांच के दौरान कुल 22 महिलाएं गंभीर रूप से एनिमिक यानी शरीर में अत्यधिक खून की कमी से ग्रसित पाई गईं. इन सभी को तुरंत ‘हाई रिस्क प्रेग्नेंसी’ (HRP) की श्रेणी में डालते हुए उनके विशेष खान-पान, मुफ्त आयरन की दवाओं और सुरक्षित प्रसव के लिए डॉक्टरों को स्पेशल मॉनिटरिंग रजिस्टर तैयार करने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.

मरीज को थमा दी एक्सपायरी सिरप, शिकायत करने पर पुर्जे से दवा का नाम ही काट कर भगाया

स्वास्थ्य शिविर की इस मुस्तैदी के ठीक समानांतर अस्पताल में लापरवाही का एक बेहद खौफनाक जिन्न भी बाहर आ गया है. बीते एक जून को अस्पताल के दवा काउंटर से एक गरीब मरीज को एक्सपायरी (तारीख पार) सिरप थमा दी गई थी, जिसका मामला पूरे रजौली क्षेत्र में आग की तरह फैल चुका है. आरोप है कि जब मरीज ने दवा की तारीख देखकर आपत्ति जताई, तो फार्मासिस्ट ने अपनी गलती मानने के बजाय चालाकी दिखाते हुए डॉक्टर के मूल पुर्जे पर लिखी दवा के नाम को ही पेन से काट दिया और मरीज के साथ बेहद अभद्र व अशिष्ट व्यवहार करते हुए उसे डांटकर अस्पताल से भगा दिया. इस गंभीर मामले को संज्ञान में लेते हुए सिविल सर्जन ने कहा कि राज्य स्वास्थ्य समिति के कड़े निर्देशों के आलोक में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई है और रिपोर्ट आते ही दोषी फार्मासिस्ट को सस्पेंड कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

मई का वेतन न मिलने से भूखी बैठी हैं जीएनएम नर्सें, लिपिक बदलते ही चरमरा गया सिस्टम

इस चिकित्सीय लापरवाही के साथ-साथ अस्पताल के अंदर मचे घमासान ने पूरे सिस्टम को पंगु बना दिया है. अस्पताल में दिन-रात सेवाएं देने वाली जीएनएम (नर्सों) को मई महीने का वेतन अब तक नसीब नहीं हुआ है, जिससे उनके घरों में आर्थिक संकट और भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. पीड़ित नर्सों का सीधा आरोप है कि अस्पताल के अनुभवी क्लर्क (लिपिक) बिपीन कुमार को एक साजिश के तहत हटाकर उनके स्थान पर नीलकमल नामक नए लिपिक की तैनाती की गई है. नए लिपिक की लचर और मनमानी कार्यशैली के कारण पूरी प्रशासनिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, जिससे कर्मियों के वेतन बिल से लेकर रोजमर्रा के कागजी काम लटके हुए हैं. अस्पताल में लंबे समय से स्थायी डीएस, ड्रेसर और वार्ड बॉय के पद भी खाली पड़े हैं.

प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार ने पत्र लेने से किया इनकार, रोती-बिलखती नर्सों ने सीएस से लगाए गुहार

अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब इन तमाम प्रताड़नाओं से तंग आकर पीड़ित स्वास्थ्य कर्मियों ने वर्तमान प्रभारी डीएस डॉ. दिलीप कुमार को अपना एक लिखित शिकायती पत्र सौंपना चाहा. लेकिन प्रभारी डीएस ने अपने अड़ियल और तानाशाही रवैये का परिचय देते हुए उस आवेदन को हाथ में लेने से ही साफ इनकार कर दिया. इस व्यवहार से तंग आकर अंततः पीड़ित महिला स्वास्थ्य कर्मियों का सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने सिविल सर्जन की गाड़ी के सामने ही अस्पताल परिसर में जमकर रो-रोकर हंगामा काटना शुरू कर दिया.

महिला कर्मियों ने रोते हुए सिविल सर्जन को अपनी लिखित शिकायत सौंपी. सिविल सर्जन डॉ. बिनोद कुमार चौधरी ने रोती-बिलखती नर्सों की सभी समस्याओं को बेहद संजीदगी और गंभीरता से सुना. उन्होंने मौके पर ही प्रभारी डीएस और नए लिपिक को कड़ी फटकार लगाई और कर्मियों को आश्वासन दिया कि अस्पताल की आंतरिक गुटबाजी को दो दिनों के भीतर ठीक कर लिया जाएगा और उनके रुके हुए वेतन की निकासी के लिए विशेष आदेश जारी किए जा रहे हैं.

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Published by: Aditya Kumar Ravi

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