Nawada News : नवादा मंडल कारा में 20 वर्षीय विचाराधीन बंदी घनश्याम कुमार उर्फ दुलार चंद उर्फ घनश्याम चौहान की संदिग्ध परिस्थितियों में फांसी से हुई मौत के मामले में जांच तेज हो गई है. घटना के दिन ही फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम ने जेल पहुंचकर घटनास्थल का वैज्ञानिक तरीके से निरीक्षण किया और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए. वहीं, ड्यूटी में प्रथम दृष्टया लापरवाही मिलने पर जेल प्रशासन ने सिपाही नीतीश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. पूरे मामले की विभागीय, पुलिस और एफएसएल स्तर पर जांच जारी है.
फंदे से लटका मिला बंदी, अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
बुधवार दोपहर करीब तीन बजे मंडल कारा में उस समय हड़कंप मच गया, जब विचाराधीन बंदी घनश्याम चौहान के फंदे से लटके होने की सूचना मिली. जेलकर्मियों ने तत्काल उसे नीचे उतारा और जेल में मौजूद चिकित्सकों ने सीपीआर देकर बचाने का प्रयास किया. गंभीर हालत में उसे सदर अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया.
वार्ड की चाबी बंदी तक कैसे पहुंची, जांच का सबसे बड़ा सवाल
जेल अधीक्षक बृजेश सिंह मेहता ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना के समय मृतक किसी तरह ड्यूटी पर तैनात सिपाही से ऊपरी वार्ड के मुख्य गेट की चाबी ले गया, या उसे चाबी दे दी गई. इसके बाद उसने ऊपर जाकर सीढ़ी वाले गेट को अंदर से बंद कर लिया और रेलिंग में गमछे का फंदा बनाकर आत्महत्या कर ली.
जब काफी देर तक कोई गतिविधि नहीं दिखी तो जेलकर्मियों को संदेह हुआ. दरवाजा अंदर से बंद मिलने पर गेट काटकर अंदर प्रवेश किया गया, जहां बंदी फंदे से लटका मिला.
लापरवाही पर सिपाही निलंबित, विभागीय जांच शुरू
घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था में चूक मानते हुए ड्यूटी पर तैनात सिपाही नीतीश कुमार को तत्काल निलंबित कर दिया गया है. जेल प्रशासन ने विभागीय जांच भी शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि जांच में यदि किसी अन्य कर्मी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी.
एफएसएल और पुलिस जुटी, CCTV और ड्यूटी रजिस्टर की जांच
एफएसएल टीम ने वार्ड, सीढ़ी, रेलिंग और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर कई साक्ष्य एकत्र किए हैं. पुलिस सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, चाबी की सुरक्षा व्यवस्था और ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों से पूछताछ कर रही है. पूरे मामले की जांच वारिसलीगंज सर्किल पुलिस निरीक्षक धर्मेंद्र कुमार को सौंपी गई है.
घटना वाले दिन मां से हुई थी मुलाकात
जांच में यह भी सामने आया है कि घटना वाले दिन सुबह करीब 9:45 बजे मृतक की मां उससे मिलने मंडल कारा पहुंची थीं. उन्होंने घनश्याम के अलावा जेल में बंद अपने दूसरे बेटे से भी मुलाकात की थी. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मुलाकात के बाद ऐसी कौन-सी परिस्थितियां बनीं, हालांकि अभी किसी संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
भाई और चाचा भी इसी जेल में हैं बंद
घनश्याम का भाई गुड्डू चौहान भी मेसकौर थाना कांड संख्या 228/25 में न्यायिक हिरासत में इसी जेल में बंद है. वहीं उसका चाचा गुरुदेव चौहान भी सामूहिक दुष्कर्म एवं पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में नवादा मंडल कारा में बंद है. एक ही परिवार के तीन सदस्यों का एक ही जेल में बंद होना भी जांच का अहम पहलू माना जा रहा है.
पॉक्सो और सामूहिक दुष्कर्म मामले में था विचाराधीन बंदी
घनश्याम कुमार उर्फ दुलार चंद मेसकौर थाना कांड संख्या 97/25 का अभियुक्त था. उस पर एक महादलित परिवार की नाबालिग लड़की के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का आरोप था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर 15 मई 2025 को न्यायिक हिरासत में नवादा मंडल कारा भेजा था.
जेल सुरक्षा व्यवस्था पर उठे कई गंभीर सवाल
घटना के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रतिबंधित वार्ड की चाबी बंदी तक कैसे पहुंची. क्या उसने चाबी छीनी या उसे दी गई? निगरानी व्यवस्था में चूक कहां हुई और ड्यूटी पर मौजूद कर्मियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? इन सभी बिंदुओं की जांच की जा रही है.
पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
नगर थाना पुलिस ने यूडी केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शव का पोस्टमार्टम पटना में कराया गया है. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल सुरक्षा में लापरवाही का था या इसके पीछे अन्य परिस्थितियां भी जिम्मेदार थीं.
