Nawada News: नवादा में मानसून की कमजोर गतिविधियों और सामान्य से कम वर्षा ने कौआकोल समेत जिलेभर के किसानों की चिंता बढ़ा दी है. पर्याप्त बारिश न होने के कारण धान की रोपनी का कार्य पूरी तरह प्रभावित हो रहा है. धान रोपाई का समय बीतने के साथ किसानों की बेचैनी बढ़ती जा रही है.
मौसम के इस रुख को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) सेखोदेवरा कौआकोल, नवादा के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. जयवंत कुमार सिंह एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ रविकांत चौबे ने किसानों के लिए विशेष कृषि परामर्श जारी किया है.
धान की जगह कम पानी वाली वैकल्पिक फसलों को दें प्राथमिकता
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की बेरुखी से धान जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं. ऐसे में किसानों को पारंपरिक खेती के बजाय वैकल्पिक फसलों को अपनाने की सख्त जरूरत है.
केवीके विशेषज्ञों ने किसानों को निम्नलिखित सलाह दी है:
- वैकल्पिक फसलें: जिन क्षेत्रों में वर्षा कम हुई है, वहां धान की रोपाई पर निर्भर रहने के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें जैसे— मक्का, अरहर, बाजरा, ज्वार, मूंग, उड़द, तिल एवं अन्य दलहनी व तिलहनी फसलों को प्राथमिकता दें.
- सिंचाई वाले क्षेत्र: जहां सिंचाई के साधन उपलब्ध हैं, वहां कम समय और कम पानी में तैयार होने वाली धान की किस्मों को ही लगाएं.
नमी संरक्षण और फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह
कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में उपलब्ध नमी को बचाए रखने के लिए मेढ़बंदी, मल्चिंग और वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) जैसी तकनीकों को अपनाने की अपील की है.
विशेषज्ञों ने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) अपनाकर ही खेती के जोखिम को कम किया जा सकता है. किसानों से अपील की गई है कि वे मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें और किसी भी तकनीकी सलाह के लिए कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बनाए रखें.
