रजौली में प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध भानेखाप क्षेत्र इन दिनों कथित अवैध खनन गतिविधियों को लेकर चर्चा में है. इलाके की प्रसिद्ध अभ्रक खदानों में अवैध उत्खनन की शिकायतें पहले से सामने आती रही हैं, लेकिन अब पहाड़ियों से पत्थरों के कथित अवैध उत्खनन का दायरा भी बढ़ने का आरोप है. स्थानीय लोगों के अनुसार, दिन-रात खदानों के आसपास पहाड़ियों में खुदाई और ब्लास्टिंग की गतिविधियां जारी रहती हैं. भारी मशीनों और विस्फोटकों के इस्तेमाल से इलाके का प्राकृतिक स्वरूप प्रभावित हो रहा है. इस अंधाधुंध खनन से पर्यावरण संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
अभ्रक की आड़ में कीमती पत्थरों के खनन का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अभ्रक खदानों के आसपास पहाड़ियों से ऐसे पत्थरों का भी उत्खनन किया जा रहा है, जिनकी बाजार में अच्छी कीमत है. इनमें वायरल पत्थर भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल कजरिया टाइल्स में किए जाने की बात कही गई है. आरोप है कि मजदूरों से यह पत्थर करीब 50 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जाता है, जबकि बाजार में इसकी कीमत 350 से 500 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है. इस अंतर के कारण अवैध तरीके से पत्थर निकालने और उसे बाहर भेजने का कारोबार लगातार बढ़ने का आरोप लगाया जा रहा है.
अवैध खनन से सरकार को राजस्व का नुकसान
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि कोडरमा और स्थानीय स्तर पर सक्रिय कथित खनन माफियाओं के नेटवर्क के कारण सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. बिना वैध लीज, पर्यावरणीय स्वीकृति और चालान के खनिजों के उत्खनन और परिवहन का आरोप है. बताया जाता है कि मशीनों से पहाड़ियों को काटकर जंगलों के भीतर रास्ते बनाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल खनन स्थलों से पत्थर और अभ्रक बाहर भेजने में किया जाता है. ओवरलोडेड वाहनों की आवाजाही को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं. इससे संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
गहरे गड्ढों में बिना सुरक्षा उपकरण काम करते हैं मजदूर
भानेखाप की कथित अवैध खदानों में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा भी गंभीर चिंता का विषय है. आर्थिक तंगी के कारण स्थानीय गरीब मजदूर खतरनाक परिस्थितियों में काम करने को मजबूर हैं. आरोप है कि कई मजदूर बिना हेलमेट, सुरक्षा जूते और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों के गहरे गड्ढों और कमजोर चट्टानों के बीच काम करते हैं. खदान धंसने और चट्टानों के खिसकने की घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि हादसे होने पर कई घटनाओं को दबाने की कोशिश की जाती है, जिससे वास्तविक स्थिति सामने नहीं आ पाती.
ब्लास्टिंग से मकानों में दरार और धूल से बीमारी का खतरा
पत्थरों के उत्खनन के लिए की जाने वाली कथित अनियंत्रित ब्लास्टिंग से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों पर भी असर पड़ने की शिकायत है. स्थानीय लोगों के अनुसार, विस्फोट के कारण आसपास के कुछ मकानों में दरारें आने की समस्या सामने आई है. वहीं पत्थर तोड़ने और ब्लास्टिंग से उठने वाली धूल के कारण ग्रामीणों को सांस संबंधी परेशानी होने की आशंका बनी रहती है. लगातार विस्फोटों की आवाज से इलाके का शांत वातावरण भी प्रभावित हो रहा है.
ब्लास्टिंग में घायल हुआ स्कूल का बच्चा, एक हाथ काटना पड़ा
अवैध खनन का सबसे गंभीर असर बच्चों पर पड़ने का मामला भी सामने आया है. सुअरलेटी, मरमो, भानेखाप और आसपास के इलाकों में पुरुषों और महिलाओं के साथ बच्चों को भी खनन कार्य में लगाए जाने का आरोप है. सुअरलेटी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाला अन्नू कुमार भी कथित ब्लास्टिंग के दौरान खदान धंसने से घायल हो गया. गंभीर चोट के कारण उसे एक हाथ कटवाना पड़ा और इसके बाद उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई. विद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, अन्नू के पिता गौतम मांझी की मौत के बाद उसकी मां रीता देवी बेटे को साथ लेकर खदान में काम करने जाया करती थी. इसी दौरान खदान धंसने से उसका हाथ दब गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया.
कार्रवाई की मांग, विशेष टास्क फोर्स बनाने की अपील
लगातार हो रहे कथित अवैध खनन और हादसों को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. पर्यावरण से जुड़े लोगों और समाजसेवियों का कहना है कि यदि भानेखाप की पहाड़ियों और अभ्रक खदानों में अवैध गतिविधियों पर जल्द रोक नहीं लगी तो प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान हो सकता है. लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से विशेष उच्चस्तरीय टास्क फोर्स गठित कर इलाके में सघन छापेमारी अभियान चलाने की मांग की है. साथ ही अवैध खनन में शामिल लोगों, उनके सहयोगियों और खनिजों के अवैध परिवहन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है.
वन विभाग ने कार्रवाई का दिया भरोसा
इस मामले में रेंजर नारायण लाल सेवक ने बताया कि वन विभाग की ओर से अवैध खनन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने वनकर्मियों की ओर से क्षेत्र में नियमित गश्ती किए जाने का भी दावा किया और पूर्व में की गई कार्रवाई की जानकारी दी. रेंजर ने कहा कि वह स्वयं भानेखाप स्थित खदानों का निरीक्षण करेंगे और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अब स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि विभाग के निरीक्षण के बाद अवैध खनन पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.
