यहां सेविकाएं नहीं मिलेंगे सिर्फ जुआरी

जुआरियों का अड्डा बना धमौल मनरेगा भवन व आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों की जगह जुआरियों की लगती है पाठशाला धमौल : आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 117 अपने उद्देश्य से भटक गया है. बच्चों की लगने वाली कक्षाओं के स्थान पर दिन भर जुआरियों का अड्डा होता है. हर समय जुआरी ताश के पत्ते फेंटते नजर आते हैं. […]

जुआरियों का अड्डा बना धमौल मनरेगा भवन व आंगनबाड़ी केंद्र

बच्चों की जगह जुआरियों की लगती है पाठशाला
धमौल : आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 117 अपने उद्देश्य से भटक गया है. बच्चों की लगने वाली कक्षाओं के स्थान पर दिन भर जुआरियों का अड्डा होता है. हर समय जुआरी ताश के पत्ते फेंटते नजर आते हैं. परंतु विभाग के कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं. ग्रामीणों की माने तो आंगनबाड़ी केंद्र पूरी तरह से बंदरहता है तथा निर्मित भवन पूरी तरह जुआरियों के कब्जे में होता है. आंगनबाड़ी की आवश्यकता को देखते हुए उक्त भवन का निर्माण वर्षों पहले कराया गया था. तब से लेकर आज तक इस भवन में केंद्र का संचालन नहीं किया गया. सेविका ने कहा,
केंद्र का संचालन आवास पर ही किया जा रहा है. भवन विभाग द्वारा नहीं सौंपे जाने के कारण अब तक केंद्र का संचालन भवन में नहीं किया जा रहा है. इसी वजह से जुआरियों का अड्डा बनता जा रहा है. आंगनबाड़ी केंद्र व मनरेगा भवन पर जुआरियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि बड़े लोगों व बच्चों का जमावड़ा हर-हमेशा यहां लगा रहता है. इस स्थान से थाने की दूरी लगभग आधा किलोमीटर है, परंतु पुलिस इस संबंध में कार्रवाई की जगह मूकदर्शक बनी है.
धमौल तालाब पर स्थित मनरेगा भवन में जुआ खेलते जुआरी.
क्या कहते हैं ग्रामीण
मुख्य बाजार में जुआ का अड्डा चलता है. कोई इस ओर ध्यान नहीं देता है. ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. सामान्य लोग कुछ भी कहने से कतराते हैं.
सिंधु वर्मा, समाजसेवी, धमौल
जुआरियों को कई बार समझाने का प्रयास किया गया. जुआ को बंद कराने को लेकर कई बार विभागीय पदाधिकारियों से भी बात की गयी. परंतु कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गयी.
रंजीत कुमार सिन्हा, प्राचार्य, धमौल
क्या कहती हैं अधिकारी
आंगनबाड़ी भवन विभाग को सौंपा नहीं गया है. भवन सौंपे जाने के उपरांत ही इस पर ठोस कार्रवाई की जा सकती है.
अंजलि कुमारी, सीडीपीओ

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