बेटियों के लिंगानुपात में हुई वृद्धि, बदल रही स्थिति

शून्य से छह साल तक के प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले में 985 लड़कियां नवादा नगर : जिले में शिशु लिंगानुपात के ताजे आंकड़े संतोष जनक दिख रहे हैं. सरकार के विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार नवादा में शून्य से छह साल तक के लिंगानुपात में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले में 985 लड़कियां […]

शून्य से छह साल तक के प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले में 985 लड़कियां
नवादा नगर : जिले में शिशु लिंगानुपात के ताजे आंकड़े संतोष जनक दिख रहे हैं. सरकार के विभिन्न रिपोर्ट के अनुसार नवादा में शून्य से छह साल तक के लिंगानुपात में प्रति एक हजार लड़कों के मुकाबले में 985 लड़कियां हैं, जो पूरे राज्य में सबसे अधिक है.
महिलाओं के लिए चलायी जा रही कई योजनाओं के यह सामूहिक परिणाम ही है कि इतने अच्छे रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं.
जिला सांख्यिकी विभाग द्वारा उपलब्ध आंकड़ों ने बेहतर भविष्य के संकेत दिये हैं. एक ओर जहां देश के कई हिस्सों में बेटियों को बचाने वाली योजनाओं में खर्च के बाद भी बेहतर परिणाम नहीं मिल रहे हैं, वहीं जिले का यह आंकड़े संतोष प्रदान करता है.
योजनाओं का दिख रहा असर
जिले में गर्भवती महिलाओं के पोषण से लेकर उनके जागरूकता के लिए 864 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं, जहां छह साल तक के बच्चों को टीकाकरण, पोषाहार, स्कूल पूर्व शिक्षा दिया जा रहा है. महिलाओं सही तरीके से अपना विकास कर सके इसके लिए मार्गदर्शन भी दिया जाता है.
महिला लिंगानुपात भी बेहतर
जिले में राज्य के दूसरों जिलों की तुलना में लिंगानुपात बेहतर है. पूरे राज्य में जहां एक हजार पुरुषों के मुकाबले 916 महिलाएं हैं, वहीं जिले में यह संख्या प्रति एक हजार पुरुषों पर 933 महिलाएं हैं, जो दूसरों से बेहतर है. महिला सशक्तीकरण के उपायों के कारण यह आंकड़ा बढ़ा है.
स्वयं सहायता समूह, महिलाओं के जनप्रतिनिधि के रूप में मिले अधिकारों से भी लिंगानुपात में सुधार के संकेत दिखते हैं. महिलाओं की संख्या बढ़ने के पीछे सरकारी आंकड़ेबाजी के साथ ही जिले का सांस्कृतिक रूप से सबल बनना भी माना जा रहा है.
कन्या भ्रूण हत्या रोकने में मिली मदद : सरकार की योजनाओं व गैरसरकारी संस्थाओं द्वारा लगातार चलाये जा रहे अभियानों व प्रशासन द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर छापेमारी के कारण कन्या भ्रूण हत्या को रोकने में काफी हद तक सफलता मिली है. सरकार की ओर से मुख्यमंत्री कन्या सुरक्षा योजना के तहत अब तक 2550 बेटियों को सुरक्षा बॉन्ड दिया गया है.
जिला सांख्यिकी पदाधिकारी ने कहा कि लिंगानुपात बढ़ना सुखद संकेत है. इससे आगे बेहतर काम करने का मनोबल बढ़ा है. राज्य में पहला स्थान आने से प्रशासन की ओर से चलने वाली योजनाओं को क्रियान्वित करने में बेहतर मदद मिलेगी.

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