अच्छी पहल. शहर के 24 स्लम एरिया में चलाये जा रहे स्वयं सहायता समूह
छोटी पूंजी से शुरू कर रहीं काम
नवादा (नगर) : शहर में महिलाएं नगर पर्षद द्वारा चलाये जा रहे अभियान से जुड़ कर स्वयं सहायता समूह बना रही हैं. नगर के विभिन्न मुहल्लों की महिलाएं अब छोटे-मोटे रोजगार शुरू कर घर की कमानेवाली सदस्य बन रही हैं. नगर पर्षद द्वारा शुरू की गयी इस पहल का लोगों ने स्वागत किया है. जरूरतमंद महिलाएं आपस में ग्रुप बना कर खुद का एसएचजी बना रही हैं. सही तरीके से काम करनेवाले एसएचजी ग्रुप को सरकार की ओर से सहयोग राशि भी उपलब्ध करायी जाती हैं.
इससे महिलाएं आपस में छोटी पूंजी की मदद से रोजगार भी शुरू कर रही हैं. नगर पर्षद क्षेत्र में कुल 24 स्लम एरिया हैं. इसके आसपास की महिलाएं इसमें काफी सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं. मुहल्ला स्तर पर काम का संचालन के लिए पूरे क्षेत्र को 13 एरिया में बांटा गया है. इसके तहत 203 स्वयं सहायता समूह केवल शहरी भाग में चल रहे हैं.
विभाग स्तर पर होती है मॉनीटरिंग : सभी स्वयं सहायता समूह सही ढंग से काम करे, इसके लिए पहले एरिया लेवल व उसके बाद सीटी लेवल की कमेटी बनायी गयी है. इसमें समूह से जुड़ी महिलाएं ही सदस्य होती हैं. एरिया लेवल की 13 कमेटियां नगर में काम कर रही हैं, जो अपने-अपने क्षेत्र के एसएचजी के कामों में सहयोग करती हैं. इसी एरिया लेवल के कमेटियों के चुने गये सदस्यों को मिला कर सीटी लेवल कमेटी बनायी गयी है. इसकी मासिक बैठक प्रत्येक 25 तारीख को की जाती है.
रिवाल्विंग फंड से की जाती है मदद : एसएचजी ग्रुप को सहयोग के रूप में 10 हजार रुपये की किस्त दी जाती है. यह राशि सही ढंग से काम कर रहे ग्रुप को अनुदान के रूप में सरकार उपलब्ध कराती है. नगर पर्षद क्षेत्र के एक सौ 11 एसएचजी ग्रुप को अब तक रिवाल्विंग राशि उपलब्ध करायी गयी है.
समूह की महिलाओं द्वारा राशि के सहयोग से विभिन्न प्रकार के रोजगार शुरू किये जा रहे हैं. नगर में समूहों द्वारा लहठी बनाने का काम कई समूहों द्वारा किया जा रहा है. इसके अलावा मशरूम उत्पादन, सिलाई आदि का काम भी महिलाएं कर रही हैं.
संस्था से कैसे जुड़ती हैं महिलाएं
स्वयं सहायता समूह शुरू करने के लिए कम से कम 10 महिलाओं का ग्रुप होना जरूरी है. समूह में शामिल महिलाएं पहले आपस में मिल कर ग्रुप का निर्माण करती है. ग्रुप की नियमित बैठक आदि करने के साथ माह में तय किये गये निश्चित राशि आपस में जमा करती हैं. आपस में जमा किये गये रुपये का संचालन बैंक खाता के माध्यम से किया जाता है. ग्रुप में से ही सक्रिय महिलाओं में से एक को अध्यक्ष, एक को सचिव व एक को कोषाध्यक्ष चुना जाता है, जो पूरे काम का संचालन करती हैं. समूह में जरूरत पड़ने पर महिलाएं जमा रुपये में से लोन भी ले सकती हैं.
नगर में काफी बेहतर तरीके से समूह काम कर रहा है. आपस में रुपये की जरूरत होने पर पहले महाजन से रुपये महंगे ब्याज पर उधार लेने पड़ते थे. अब जरूरत पड़ने पर समूह से ही लोन मिल जाता है. बेटी की शादी के लिए लिये गये लोन पर तीन माह का ब्याज भी नहीं देना होता है. इससे महिलाओं को काफी मदद मिली है.
हेमा खातून, रजिया संवर्द्धन स्वयं सहायता समूह
सीटी लेवल फेडरेशन के सदस्य होने के नाते सभी एसएचजी के बारे में जानने का मौका मिलता है. पशुपालन व चारे सहित अन्य कामों के लिए समूह द्वारा लोन देते हैं. समूह से जुड़ कर महिलाओं को बेहतर लाभ मिल रहा है.
गुड़िया कुमारी, गुड़िया संवर्द्धन स्वयं सहायता समूह
लहठी चूड़ी बनाने का काम शुरू किया गया है, जिन महिलाओं के पास पहले कुछ भी नहीं था. वे सही ढंग से समूह से जुड़ कर अपना रोजगार शुरू कर पाने में सक्षम हुई है. विभाग की ओर से प्रशिक्षण व बनाये गये माल की बिक्री में भी सहयोग दिया जाता है.
शर्मिला देवी, संध्या संवर्द्धन स्वयं सहायता समूह
एसएचजी ग्रुप से महिलाओं को काफी ताकत मिली है. पहले 10 रुपये के लिए भी मोहताज होना पड़ता था. अब रोजगार के माध्यम से अब घर के कमाने वाले सदस्य बन गये हैं. एक साथ कई महिलाओं के साथ काम करने से एक दूसरे के गुणों को सिखने का मौका भी मिलता है.
बिंदु देवी, मां दुर्गा संवद्धन स्वयं सहायता समूह
क्या कहते हैं अधिकारी
नगर पर्षद क्षेत्र में कार्य करनेवाले समूहों को हर संभव मदद दी जा रही है. सहकारिता विभाग से रजिस्ट्रेशन के मामले में हम आगे हैं. क्षेत्र के आठ समूहों को को-ऑपरेटिव एक्ट के तहत निबंधित किया गया है.
शशिकांत सिंह, सीटी मिशन मैनेजर
