विद्यालय का चापाकल खराबवारिसलीगंज. प्रखंड के कई विद्यालयों में वर्षों से विभागीय अधिकारी व शिक्षकों की लापरवाही के कारण चापाकल खराब है. इसके कारण स्कूली बच्चों सहित शिक्षकों को भी पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. कुछ इसी तरह की समस्या नवसृजित प्राथमिक विधालय मलुका बिगहा की है. जानकारी के अनुसार, फरवरी 2007 से यह विद्यालय स्थापित है. विद्यालय को तीन साल तक निजी भवन में चलाया गया. वर्ष 2010 में लगभग सात लाख की लागत से विद्यालय के लिए तीन कमरे, एक कार्यालय, एक किचन सेट, दो शौचालय व एक चापाकल गाड़ा गया था. दुर्भाग्य से चापाकल दो साल पहले ही समाप्त हो गया और तब से अभी तक चापाकल खराब है. विद्यालय के छात्र व छात्राओं ने बताया कि चापाकल के अभाव में प्यास लगने पर गांव में जाकर पानी पीना पड़ता है. यह दुर्भाग्य है. शिक्षकों का कहना है कि मध्याह्न भोजन बनाने को लेकर भी पानी गांव से लाना पड़ता है. इससे रसोईया खिन्न रहते हैं. विद्यालय प्रधान पवन कुमार ने बताया कि चापाकल मरम्मत व नए सिरे से लगाने को लेकर पीएचइडी व शिक्षा विभाग के अधिकारियों को कई बार लिखित सूचना दी गयी है. इसके बाद भी इस समस्या का समाधान अब तक नहीं हो सका है. विद्यालय परिसर में मिट्टी भराई व विद्यालय के रास्ते पइन पर पुलिया निर्माण की जरूरत भी बतायी जाती है. इसके कारण बच्चों के स्कूल आवागमन में परेशानी हो रही है. बरसात के दिनों में यह परेशानी और भी बढ़ जाती है.
वद्यिालय का चापाकल खराब
विद्यालय का चापाकल खराबवारिसलीगंज. प्रखंड के कई विद्यालयों में वर्षों से विभागीय अधिकारी व शिक्षकों की लापरवाही के कारण चापाकल खराब है. इसके कारण स्कूली बच्चों सहित शिक्षकों को भी पानी के लिए तरसना पड़ रहा है. कुछ इसी तरह की समस्या नवसृजित प्राथमिक विधालय मलुका बिगहा की है. जानकारी के अनुसार, फरवरी 2007 से […]
