नवादा : 12 वेटनरी डॉक्टरों के सहारे चल रहे 38 पशु अस्पताल
नवादा नगर : पशुओं के इलाज के लिए सरकारी पशु डॉक्टरों का इंतजार भारी पड़ता जा रहा है. हालत यह है कि नवादा जिले के 38 पशु अस्पतालों को संभालने के लिए केवल 12 पशु चिकित्सक बहाल हैं. ऐसे में जिले में पशुओं के इलाज व सरकारी योजनाओं का लाभ किस प्रकार से पशुपालकों को […]
नवादा नगर : पशुओं के इलाज के लिए सरकारी पशु डॉक्टरों का इंतजार भारी पड़ता जा रहा है. हालत यह है कि नवादा जिले के 38 पशु अस्पतालों को संभालने के लिए केवल 12 पशु चिकित्सक बहाल हैं. ऐसे में जिले में पशुओं के इलाज व सरकारी योजनाओं का लाभ किस प्रकार से पशुपालकों को मिल रहा होगा, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है. जिले में दर्जनों पशु अस्पताल तो महीनों तक खुल भी नहीं पाते हैं. एक डॉक्टर को तीन से चार अस्पतालों का जिम्मा मिला हुआ है.
ऐसे में उन अस्पतालों में सभी काम लंबित पड़े रहते हैं. शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के इलाज के लिए सुविधा होने के बाद भी डॉक्टरों की कमी के कारण सही से इलाज नहीं हो पाता है. पिछले दिनों प्राइवेट वैक्सीनेटरों की मदद से तीन लाख 75 हजार पशुओं को मुंहपका व खुरहा रोग से बचाव के लिए टीके लगाये जाने का दावा पशु अस्पताल प्रबंधकों के द्वारा किया जा रहा है, लेकिन टीके लगाये जाने के कार्यक्रम की कितनी मॉनीटरिंग सीमित चिकित्सा अधिकारियों द्वारा किया गया होगा यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है, क्योंकि सरकारी योजनाओं को पूरा करवाने की जिम्मेदारी भी इन पशु चिकित्सकों पर होती है.
जैसे-तैसे चल रहा काम : पशु अस्पतालों के लिए विभाग के द्वारा कांट्रैक्ट पर पशु डॉक्टरों की नियुक्ति एक साल के लिए की जाती है. 20 अप्रैल को जिले के छह भ्रमणशील पशु चिकित्सक तथा पांच ब्लॉक अस्पतालों के कांट्रैक्ट डॉक्टरों का समय समाप्त हो गया. कांट्रैक्ट डॉक्टरों के रहने के बाद भी जिले में पशु चिकित्सकों की कमी रहती थी. अब 11 कांट्रैक्ट के डॉक्टरों की सेवा समाप्त होने के बाद और भी अधिक समस्या हो रही है. जिले के सभी 14 प्रखंड मुख्यालयों के अलावे बड़े कस्बाई क्षेत्रों में पशु अस्पताल बने हैं. इन सभी 38 पशु अस्पतालों में जैसे-तैसे काम चल रहा है.
बकरीपालन प्रोजेक्ट को पूरा कराने पर जोर : पशुपालन विभाग द्वारा बकरीपालन कर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए अनुदान का लाभ देते हुए सहयोग किया जा रहा है. वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 10 बकरी व एक बकड़े के छोटे पालन केंद्र शुरू करने के नौ तथा 20 बकरी व दो बकड़े के पालन केंद्र की शुरुआत करने के लिए तीन लाभुकों का चयन किया गया है. इन सभी केंद्रों पर विधिवत निर्माण के साथ बकरीपालन का काम समय से पूरा हो इसके लिए विभागीय स्तर पर स्थल जांच सहित निर्माण संबंधित जानकारियां दी गयी. विभाग के अधिकारियों ने कहा कि तय समय में काम पूरा कराया जायेगा.
देशी नस्ल को दिया जा रहा बढ़ावा : दुधारू पशुओं में अभी देशी नस्ल के सांड़ से क्रॉस ब्रीडिंग कराने पर जोर दिया जा रहा है. जर्सी जैसी विदेशी नस्ल के बदले देशी नस्ल से ब्रीडिंग कराने से पशुओं में बीमारी की समस्या घटी है. पशु डॉक्टरों ने कहा कि जिला में शाहीवाल, थारपारकर आदि नस्ल के देशी क्रॉस ब्रीडिंग काफी कारगर हो रही है. देशी नस्ल में बीमारी की समस्या कम होती है. देशी नस्लों में हरियाणा, गीर, शाहाबादी, बछौड़ आदि नस्ल की ब्रीडिंग भी की जा रही है.
24 घंटे एक ही डॉक्टर कैसे करेंगे ड्यूटी
जिला मुख्यालय में बने पशु चिकित्सा केंद्र में सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे पशुओं के इलाज की सुविधा दी गयी है. लेकिन, केंद्र में केवल एक डॉक्टर वर्तमान समय में कार्यरत है. ऐसी स्थिति में 24 घंटे सेवा दे पाना कैसे संभव होगा. कांट्रैक्ट डॉक्टरों की सेवा अवधि समाप्त होने के बाद मुख्यालय में भी इलाज के लिए परेशानी हो गयी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
डॉक्टरों की कमी होने से काम प्रभावित हो रहा है. गर्मी में लू, डायरिया आदि से बीमार पशुओं को इलाज के लिए लाया जा रहा है. विभागीय कामों को पूरा करने के साथ पशुओं के इलाज में डॉक्टरों को लगना पड़ता है. काम का बंटवारा कर किसी तरह विभागीय काम पूरा किया जा रहा है.
