मुहिम. बीमारी की रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की ठोस पह
बिहारशरीफ : जानलेवा बीमारी एइएस/जेइ पर रोकथाम को स्वास्थ्य विभाग ने ठोस पहल की है. गांव,कसबों व टोलों में जाकर इसके संदिग्ध रोगियों की पहचान करने के लिए मुकम्मल तौर पर कदम उठाया गया है. जिस क्षेत्र में संदिग्ध रोगी के प्रतिवेदित होने की सूचना मिलेगी वहां के हर घर में जाकर इसकी खोज की जायेगी. इस कार्य में लगे कर्मियों को मरीज खोजने के एवज में उन्हें प्रोत्साहन राशि भी उपलब्ध करायी जायेगी. इस तरह सरकार की योजना के मुताबिक नये मरीज खोजें
और रुपये पायें.इस योजना से जिले की आशा लाभांवित होंगी. जो आशा कार्यकर्ता एइएस/जेइ के संदिग्ध रोगियों को खोज निकालेंगे उसका चिकित्सीय जांच की जायेगी. जांच में संदिग्ध में बीमारी की पुष्टि हो जाती है तो प्रोत्साहन के रूप में संबंधित आशा को राशि उपलब्ध करायी जायेगी. प्रत्येक मरीज पर तीन सौ रुपये के हिसाब से भुगतान किया जायेगा. राशि का भुगतान संबंधित आशा के बैंक खातों के माध्यम से किया जायेगा. जी हां आप यदि आशा हैं तो सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना का लाभ लेने के लिए आगे आयें और एइएस के नये रोगियों की पहचान कर इस जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए सरकार के कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भागीदारी निभाएं.
ट्रेंड आशा मरीजों की करेंगी पहचान : जानलेवा बीमारी एइएस / जेइ रोग की पहचान ट्रेंड आशा करेंगी. इस रोग के लक्षण की पहचान करने के लिए जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थापित आशा कार्यकर्ताओं को ट्रेंड किया जायेगा. जिला स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही जिले के सभी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है कि संस्थान में काम करने वाली आशा को इस बारे में प्रशिक्षित किया जाय,उन्हें जेइ व एइएस के लक्षण व बचाव के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी जाय. ताकी प्रशिक्षित आशा क्षेत्रों में जाकर इसके पीडि़त बच्चों की पहचान सुलभ तरीके से कर सकेंगी.चिंहित रोगियों को निकट के अस्पताल में भेजेंगी.
आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी दवा रहेगी उपलब्ध :इस रोग से बचाव के लिए जिले के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर भी जीवनरक्षक दवाइयां उपलब्ध करायी जायेंगी.ताकी संदिग्ध रोगी की पहचान होने पर पीडि़त को प्रारंभिक तौर पर दवा दी जा सके और बाद में उसे बेहतर इलाज के लिए निकट के अस्पताल में भरती कराया जा सके.जिले के सभी पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों व अनुमंडलीय अस्पतालों के उपाधीक्षकों को दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
आंगनबाड़ी केन्द्रों से लेकर स्वास्थ्य उप केन्द्रों पर ओआरएस,पारासिटामोल आदि दवा उपलब्ध कराने को कहा गया है.उक्त दवाओं की उपलब्धता अविलंब सुनिश्चित करने की हिदायत दी गयी है.
हरेक रोगी पर मिलेंगे तीन सौ रुपये
योजना से आशा होंगी लाभांवित
मरीजों का पता व मोबाइल नंबर अपडेट रखेंगे कर्मी
जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ.मनोरंजन कुमार ने बताया कि जानलेवा बीमारी एइएस / जेइ के संदिग्ध मरीजों की पहचान होने पर उसका सही-सही रूप से आवासीय पता पंजी पर आशा अंकित करेंगे. साथ ही मरीजों का संपर्क नम्बर जैसे मोबाइल या टेलीफोन नम्बर भी लेकर पंजी में दर्ज करने का काम करेंगे.इसका मुख्य उद्देश्य है कि मरीजों का इलाज होने के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज होने पर भी उस पर नजर रखी जाय.ताकी पता चल सके कि संबंधित रोगी का इलाज के बाद अद्यतन स्थिति क्या है.लाइन लिस्ट बनाने में इस बात पर विशेष ध्यान देने की हिदायत एमओआइसी को दी गयी है.
जिले में इस बार अब तक एक मरीज की पहचान चंडी में हो चुकी है.चंडी के सिंदूयारा गांव में एक बच्ची इस रोग से पीडि़त पायी गयी थी. इसके बाद चंडी अस्पताल के प्रभारी को अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने हिदायत दी है कि वहां पूरी तरह से पैनी नजर रखी जाय.जिन बच्चों को जेई से बचाव का टीका नहीं लग सका है उसे टीका लगाने की व्यवस्था करें.जिन बच्चों को सात दिनों से बुखार लगा हो तो उसका इलाज तुरंत कराने की व्यवस्था करायें.ऐसे बच्चों पर पूरी तरह से निगरानी रखी जाय.
क्या कहते हैं अधिकारी
एइएस/जेइ बीमारी से निपटने व रोकथाम के लिए व्यापक तौर पर कदम उठाया गया है.पीएचसी और अनुमंडलीय स्तरों पर चार व सदर अस्पताल में दस बेडों का अलग वार्ड की व्यवस्था करने को कहा गया है.डीएमओ को दवा क्रय करने का निर्देश दिया गया है.संदिग्ध मरीजों की पहचान होने पर और उसका रोग कंफर्म होने पर रोगी को खोज करने वाली आशा को प्रोत्साहन राशि दी जायेगी.हरेक कंफर्म रोगी पर तीन सौ रुपये दिये जाने का प्रावधान है.
डॉ ललित मोहन प्रसाद,एसीएमओ,नालंदा
