शौच की व्यवस्था नहीं होने से महिला यात्रियों को होती है घोर परेशानी
बिहारशरीफ : अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल राजगीर को जोड़ने वाला पावापुरी रेलवे स्टेशन अभी तक बुनियादी सुविधाओं का बाट जोह रहा है. बख्तियारपुर-राजगीर रेलखंड को जोड़ने वाला यह स्टेशन पर्यटकों के हिसाब से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. जैन धर्म के अनुयायियों का यहां आना खूब होता है.बावजूद इसके रेलवे द्वारा पावापुरी रेलवे स्टेशन पर किसी तरह की कोई विशेष सुविधा प्रदान नहीं की गयी है.स्टेशन परिसर में पीने के पानी व शौच का घोर अभाव है.
महिला यात्रियों को इससे काफी परेशानी होती है.रेलवे प्रशासन द्वारा स्टेशन परिसर में दो हैंड पंप लगाये गये थे,जिसमें एक हैंड पंप पिछले एक वर्ष से खराब पड़ा है.पावापुरी रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन 11 जोड़ी ट्रेनों का ठहराव है.जिसमें एक सुपर फास्ट व एक एक्सप्रेस ट्रेन शामिल है.इस स्टेशन से पटना के आगे तक की टिकट यात्रियों को नहीं दी जाती है.स्टेशन पर अभी भी कूट प्रिंटेड टिकट की व्यवस्था है.आरक्षण की व्यवस्था यहां उपलब्ध नहीं है.राजगीर से नई दिल्ली को जाने वाली श्रमजीवी सुपरफास्ट व राजगीर से बनारस को जानी वाली बुद्ध पूर्णिमा एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव पावापुरी रेलवे स्टेशन पर होने के बावजूद भी यहां से पटना के अलावे किसी और स्थान के लिए रेल यात्रियों को टिकट नहीं उपलब्ध कराया जाता है.
दिल्ली जाने के लिए टिकट लेने में होती है फजीहत
बख्तियारपुर-राजगीर रेलखंड पर अवस्थित प्रमुख स्टेशन में शामिल पावापुरी स्टेशन पर दिल्ली जाने लिए टिकट लेने में पसीने बहाने पड़ते हैं.स्थिति यह है कि जो यात्री इस स्टेशन पर से दिल्ली के लिए गाड़ी पकड़ना चाहते हैं तो उन्हें यहां से टिकट नहीं मिल पाती,लिहाजा यात्रियों को राजधानी की गाड़ी पकड़ने के लिए पावापुरी स्टेशन 6 किलोमीटर बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन या 8 किलोमीटर दूरी तय कर नालंदा रेलवे स्टेशन जाने पड़ती है.विडंबना यह है कि देश की राजधानी दिल्ली जाने वाली गाड़ी श्रमजीवी का इस स्टेशन पर ठहराव है परंतु टिकट की व्यवस्था अब तक नहीं की जा सकी है.लिहाजा यात्रियों को रोज फजीहत झेलनी पड़ती है.
क्यों खास है पावापुरी रेलवे स्टेशन
पूर्व मध्य रेलवे द्वारा संचालित इस रेलवे स्टेशन को वर्ष 2014 में हाल्ट स्टेशन से क्रॉर्सिंग स्टेशन में परिणत किया गया था.पावापुरी जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र स्थल है.
इसे अपापुरी यानि निष्पाप नगरी भी कहा जाता है.पावापुरी में जैन धर्म के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर ने अपनी अंतिम सांस ली और यहीं पर लगभग 500 ईसा पूर्व इनका दाह-संस्कार किया गया.लगभग 2500 वर्ष पूर्व आजातशत्रु के शासनकाल में हस्तीपाल पावापुरी का राजा था.इस कालावधि में भगवान महावीर चंपापुरी से चलकर यहां पहुंचे थे और राजा हस्तीपाल के राजकीय अतिथिशाला में अपना चतुर्मास व्यतीत किया था.यहीं भगवान महावीर ने अपना प्रथम धर्म-प्रवचन दिया था.इसी कारण पावापुरी को जैन सम्प्रदाय का सारनाथ माना जाता है.
पावापुरी रेलवे स्टेशन से पावापुरी करीब 10 किमोमीटर पर है.प्रत्येक वर्ष हजारों की संख्या में जैन धर्म से जुड़े लोग ट्रेन के माध्यम से इसी रेलवे स्टेशन पर उतरकर पावापुरी पहुंचते हैं.अप्रैल माह में नालंदा के पास स्थित कुंडलपुर महोत्सक को लेकर भी जैन धर्म से जुड़े लोगों का यहां आना होता है. बिहारशरीफ रेलवे स्टेशन प्रबंधक एसके प्रदीप ने बताया कि निकट भविष्य में पावापुरी रेलवे स्टेशन पर जन टिकट बुकिंग सहायक खुलने जा रहा है.रेलवे प्रशासन द्वारा इसकी व्यवस्था की जा रही है.उन्होंने बताया कि पावापुरी रेलवे स्टेशन के लिए और कई तरह की सुविधाएं बहुत जल्द पूरी होने वाली है.
