बिहारशरीफ : रोगियों की पहचान करने के लिए घरों में दस्तक देने लगी जिले की आशा व आंगनबाड़ी सेविकाएं. गुरुवार से जिले के हर प्रखंड के प्रत्येक गांव के हर घर के दरवाजे खटखटाने में जुटी हैं आशा.घर के दरवाजे के अंदर प्रवेश कर आशा व सेविकाएं कुष्ठ के नये रोगियों की तलाश के लिए संबंधित घर के हर सदस्य के शरीर के अंगों की जांच -परख करनी शुरू कर दी है.आशा व सेविकाएं जहां घर के महिला सदस्यों की जांच करने में लगी हैं तो पुरुष वर्कर पुरुषों की जांच करने में.इसका मुख्य उद्देश्य है कुष्ठ के नये रोगियों की पहचान कर उसे चिकित्सा सेवा प्रदान करने का.
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लेप्रोसी केस डिडेक्शन कंपेन जिले में शुरू हुआ.यह कंपेन 12 अप्रैल तक चलेगा.
रोगियों की पहचान करने में 2479 आशा लगीं
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शुरू हुए लेप्रोसी केस डिडेक्शन कंपेन अभियान को सफल बनाने के लिए नालंदा जिले में 2479 आशा कार्यकर्ता जुटी हैं.साथ ही इतना जिले की आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद ली जा रही हैं.आशा व आंगनबाड़ी सेविकाएं अपने-अपने क्षेत्रों के गांव,कसबों व टोलों के घरों में जाकर लेप्रोसी की पहचान करने के लिए हरेक घर के सदस्यों के शरीर में उभरे दाग व सुनापन की जांच कर रही हैं.जिन लोगों में तांबे रंग का दाग व उसमें सुनापन है तो उसे लेप्रोसी के संदिग्ध मरीजों की श्रेणी में रखी जा रही है.आशा के कार्यों पर निगरानी रखने के लिए 20 आशा पर एक आशा फैसिलिटेटर व बीस सेविकाओं पर एक पर्यवेक्षिका की भी तैनाती की गयी है.
संदिग्ध मरीजों की होगी चिकित्सीय जांच
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लेप्रोसी केस डिडेक्शन कंपेन कार्यक्रम के दौरान जिले में चिंहित होने वाले रोगियों की चिकित्सीय जांच की जायेगी.यदि जांच में लेप्रोसी की जीवाणु किसी में पाया जाता है तो संबंधित लोगों की चिकित्सा शुरू की जायेगी.कुष्ठ का रोग कंफर्म होने पर उसे रोग मुक्त होने के लिए जिला कुष्ठ निवारण विभाग की ओर से एमडीटी की गोली दी जायेगी.ताकी इस दवा का सेवन करने से संबंधित रोगी रोगी मुक्त हो सके.यह दवा विभाग की ओर से नि:शुल्क तौर पर उपलब्ध करायी जायेगी.
एमबी रोगी पर है विशेष नजर
कुष्ठ रोग के दो तरह के मरीज होते हैं. पहला पीबी और दूसरा एमबी.एमबी रोगी पर विशेष नजर रखने की जरूरत होती है.यदि ये रोगी समय पर इलाज नहीं कराते हैं तो वे दूसरे लोगों को भी प्रभावित कर सकते हैं.एमबी रोगी के शरीर के अंग में तीन से पांच दाग होते हैं. एेसे दाग वालों को एमबी कुष्ठ रोगी की श्रेणी में रखकर इलाज शुरू किया जाता है.एमबी रोगी को एक साल तक दवा खानी पड़ती है जबकि पीबी के मरीजों को छह माह तक एमडीटी की दवा खाने के लिए दी जाती है.वैसे तो उक्त दोनों तरह के मरीजों को उम्र के हिसाब से दवा उपलब्ध करायी जाती है. जो चिकित्सकों के सलाह के अनुरूप मरीज दवा का सेवन करते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के तहत लेप्रोसी केस डिडेक्शन कंपेन जिले में शुरू हुआ है.इस कार्यक्रम के तहत कुष्ठ के नये मरीजों की पहचान की जा रही है.नये मरीज की पुष्टि होने पर हरेक मरीज के हिसाब से चार साढ़े सौ रुपये आशा व सेविकाओं को उपलब्ध कराये जायेंगे.नये रोगियों की चिकित्सा शुरू कर उसे एमडीटी की दवा नि:शुल्क दी जायेगी.
डॉ रविंद्र कुमार,डीएलओ,नालंदा
