अनदेखी. कैसे होगी बेटियों का विवाह, रिफंडेबल लोन सिस्टम हुआ बंद
सरकारी सेवक अब भविष्य निधि से नहीं ले सकेंगे रिफंडेयबल लोन
पहली अप्रैल से नियमावली में किया गया परिवर्तन
बिहारशरीफ : अगर आप सरकारी सेवक है और भविष्य निधि से लोन लेकर बेटी की शादी करने की सोच रहे है,तो सरकार के नये नियम को जान लें. यह जानकारी थोड़ा निराश कर सकता है. नये आदेश से कर्मी को झटका लग सकता है. फिर भी यह जानकारी रखना भी बेहद जरूरी है. नये नियम के अनुसार पहली अप्रैल 2017 से नियम में बदलाव किया गया है. इसके तहत भविष्य निधि से मिलने वाले रिफंडेबुल लोन को समाप्त कर दिया गया है. अब सरकारी सेवक रिफंडेबुल लोन नहीं ले सकेंगे. यह आदेश जिला भविष्य निधि कार्यालय को प्राप्त हो गया है. इसकी जानकारी सेवकों को दी जा रही है.
हालांकि नियम के अनुसार नन रिफंडेबुल लोन की प्रक्रिया जारी रहेगा. यानि कि सेवक अब भविष्य निधि के खाते से लोन तो ले सकते है. लेकिन किस्तों में लौटने के स्थान पर, एकदम से कटौती बाला लोन मिलेगा. इसके तहत राशि सेवक खाते से लोन के रूप में जितनी राशि लेंगे उनके भविष्य निधि के खाते के खाते से काटकर दी जायेगी. रिटायर्टमेंट के समय मिलने बाला अंतिम भुगतान की राशि में से घटा दिया जायेगा. सरकारी सेवा के दौरान दो तरह के लोन पहले सेवकों को दिये जाने का प्रावधान किया गया था. अमुमन सेवक उक्त राशि को लोन के रूप में लेकर बेटी की शादी करते थे. या फिर जमीन या मकान बनाने के काम में इस्तेमाल करते है. लोन लेने के बाद कर्मी के वेतन से रकम कर कटौती करके सामंजस्य किया जाता है. इससे होता यह था कि कर्मी को राहत मिल जाता था. नये नियम से कर्मी को नुकसान और सरकार को फायदा है. जितनी राशि खाते में रहता है उसका ही अब सुद देना पड़ेगा. खाते से रकम की निकासी के बाद सूद देने का लोड स्वत: कम हो जायेगा. नये नियम से सरकार को उतनी ही राशि का सुद देना पड़ेगा जितना खाते में होगा. कर्मी को इससे का भविष्य प्लान प्रभावित हो सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
भविष्य निधि नियमाबली में संशोधन किया गया है. भविष्य निधि से अब अग्रिम लोन को समाप्त कर दिया गया है. एक अप्रैल से नया नियम लागू हो जायेगा. इसकी जानकारी विभाग के द्वारा दे दी गयी है. विभाग से आदेश निकलने के बाद कर्मी को इसकी जानकारी दी जा रही है.
विजय कुमार रजक, जिला भविष्य निधि पदाधिकारी, नालंदा
जिले में एक हजार से ज्यादा सेवक है कार्यरत
जिले में 420 डीडीओ यानि व्ययन और निकासी अफसर है. इनके अधीन एक हजार से अधिक कर्मी सेवा दें रहे है. इसमें कलेक्ट्रेट से लेकर प्रखंड कर्मी तक शामिल है. सब लोग परिवार और बच्चों की शिक्षा के लिए इस तरह के लोन लेते है.
