कार्यक्रम. विभिन्न जिलों से आ रहे श्रद्धालु, धार्मिक संस्कार कर रहे लोग
बिहारशरीफ/नालंदा : प्रसिद्ध शीतलाष्टमी मेला के दूसरे दिन मघड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. भारी संख्या में महिलाएं हाथों में पूजन सामग्री लिये कतारों में खड़ी रहकर अपनी बारी का घंटों इंतजार करते रहीं. आस्था तथा विश्वास का अद्भुत संगम पूरे मंदिर परिसर तथा मेला क्षेत्र में देखा जा रहा है. बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता मंदिर के समीप तालाब में स्नान कर मंदिर में पूजा अर्चना करते रहे. शीतलाष्टमी मेला की ख्याति दूर दूर तक फैले होने के कारण पटना, नवादा, शेखपुरा, गया, जहानबाद आदि जिलों के साथ दूसरे प्रदेशों से भी लोग पूजा करने तथा अपने बच्चों के मुंडल कराने आ रहे हैं.
ऐसी मान्यता है कि शीतलामाता के पवित्र तालाब में स्नान कर मंदिर में प्रसाद चढ़ाने से चेचक जैसी भयानक बीमारी तुरंत ठीक हो जाती है. कई दूसरे प्रकार के चर्मरोगों से भी लोगों को यहां छुटकाराि मलता है. इसलिए दूसरे जिले तथा प्रांतों के लोग भी यहां शीतलाष्टमी मेला में आते हैं. जिलेवासियों में बसिचौढ़ा प्रसाद खाने तथा खिलाने की प्राचीन परंपरा भी अद्भूत है. मघड़ा सहित आस पास के दर्जनों गांवों के लोग अष्टमी तिथि को बसिचौढ़ा मनाते है. इसमें मीठी कुआं के पानी का उपयोग कर चावल, चना का दाल तथा लाल साग का प्रसाद बनाया जाता है, जो बासी होने पर माता को अर्पित कर ही लोग घरों में प्रसाद के रूप में खाते हैं. इस दिन मघड़ा सहित दर्जनों गांवों में लोग चुल्हे नहीं जलाते हैं.
श्रद्धालुओं से मेला क्षेत्र हो रहा गुलजार
शीतला माता मंदिर का सुबह पट खुलते ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है, जो देर शाम तक जारी रहता है. मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को देखते हुए मघड़ा गांव में सैकड़ों छोटी बड़ी अस्थाई दुकानें खुल गई है. चारों ओर प्रसाद की दुकानें, मिठाई, खिलौने, श्रृंगार आदि दुकानों के साथ कई प्रकार के झूले लगाये गये हैं. श्रद्धालुओं से पूरा मेला क्षेत्र गुलजार हो रहा है. तीन दिवसीय शीतलाष्टमी मेला का मंगलवार को विधिवत समापन हो जायेगा.
