उदासीनता . बरसात में तो चल जाता है काम, पर गरमियों में होती है मुश्किल
गरमी के मौसम ने दस्तक दे दी है. गरमी के दस्तक देते ही जिले में आग लगने की घटनाएं होने लगी हैं. सोमवार की रात्रि में राजगीर व हरनौत में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं. इन घटनाओं में करीब 50 लाख रुपये की संपत्ति से अधिक का नुकसान होने का अंदेशा है. ऐसे में हम इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि जिले में आग पर काबू पाने की क्या व्यवस्था और और उसमें क्या कमियां हैं, जिससे अप्रैल माह आने के पूर्व इन कमियों को दूर करने की व्यवस्था हो सके.
संवाददाता4बिहारशरीफ
शहर की घनी आबादी के बीच स्थित है फायर ब्रिगेड का जिला कार्यालय. कार्यालय के पास गाड़ियों की भरमार है. नयी-पुरानी इतनी गाड़ियां है कि उनके ठहराव के लिए जगह की कमी हो जा रही है. फायर ब्रिगेड कार्यालय के पास कुल सात गाड़ियां खड़ी हैं. इनमें छह बड़ी गाड़ियां हैं, जबकि एक छोटी गाड़ी है. इतनी गाड़ियों में तीन पुरानी गाड़ियां हैं, जबकि एक छोटी गाड़ी है. इतनी गाड़ियों में तीन पुरानी गाड़ियां ऐसी हैं, जो किलो के भाव में बेचने लायक हैं.
बाकी बचे तीन बड़ी गाड़ियों में से एक में थोड़ी गड़बड़ी है. फिलहाल दो बड़ी गाड़ियां और एक छोटी गाड़ी है. इतनी गाड़ियों में तीन पुरानी गाड़ियां ऐसी हैं, जो किलो के भाव में बेचने लायक हैं. बाकी बचे तीन बड़ी गाड़ियों में से एक में थोड़ी गड़बड़ी है. फिलहाल दो बड़ी गाड़ियां और एक छोटी गाड़ी ही चालू हालत में है. फायर ब्रिगेड के इन गाड़ियों को चलाने के लिए ड्राइवर के रूप में दो व्यक्ति पदस्थापित हैं, जिनमें से एक गाड़ी चलाने योग्य नहीं है. ऐसे में एक ही ड्राइवर के सहारे फायर ब्रिगेड का जिला कार्यालय चल रहा है.
मांगे दो ड्राइवर, मिला एक : ड्राइवरों की कमी को देखते हुए फायर ब्रिगेड के अधिकारी ने पत्र लिख कर दो ड्राइवरों की मांग की. इस मांग के आधार पर दो की जगह एक गृहरक्षक ड्राइवर है, जिसका हाथ कांपता है, इस कारण उसका उपयोग गाड़ी चलाने के लिए नहीं किया जाता है. अन्य स्टाफ की कोई कमी नहीं है. वहां 10 सिपाही तैनात हैं.
गरमी में गाड़ी में पानी भरने में परेशानी : फायर ब्रिगेड कार्यालय के पास गाड़ियों में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं है. नगर निगम के पास स्थित बोरिंग से पानी लेना पड़ता है. इसके अलावा लहेरी के ब्रह्मस्थान व सुभाष पार्क भीड़-भाड़ वाला इलाका होने की वजह से इन स्थानों पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को पहुंचने में परेशानी होती है. जाड़ा और बरसात में तो किसी तरह काम चल जाता है, मगर गरमी के दिनों में पानी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है.
शहर से बाहर निकलने में परेशानी : आग लगने की सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को फौरन उस स्थान पर पहुंचना होता है. घनी आबादी में फायर ब्रिगेड का कार्यालय होने की वजह से वहां से बाहर निकलने में ड्राइवर को परेशानी होती है. फायर ब्रिगेड की गाड़ियों में घंटी व सायरन लगे हैं. इन लाख बजाने के बाद भी सड़क पर चल रहे वाहन उनको लगे हैं. इन लाख बजाने के बाद भी सड़क पर चल रहे वाहन उनको आगे निकलने के लिए रास्ता नहीं देते हैं. इसके कारण अक्सर निजी वाहनचालकों से फायरब्रिगेडवालों की अक्सर नोक-झोंक होती रहती है. इसके कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर घटनास्थल नहीं पहुंच पा रही है.
अप्रैल माह में सबसे अधिक घटनाएं : आग लगने की घटनाएं ऐसे तो कमी हो सकती हैं, मगर गत वर्ष के आंकड़े को देख कर यह कहा जा सकता है कि हर वर्ष अप्रैल माह में आग लगने की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि होती है. 2015-16 में फायर ब्रिगेड के जिला कार्यालय को आग लगने की 128 सूचनाएं मिली. इनमें से सबसे ज्यादा कॉल अप्रैल माह में आये.
ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा से संबंधित कुछ ध्यान देने योग्य बातें :
रसोईघर को यथासंभव अग्निरोधक बनाने के लिए उसे चारों तरफ गीली मिट्टी का लेप लगा दें. फूस के घरों में भी मिट्टी का लेप लगाये.
देहाती क्षेत्रों में खास कर फूस एवं खपरैल मकानों के निवासी खाना सुबह 8 बजे से पहले और शाम 5 से 6 बजे के बीच बना लें.
दीप, लालटेन, ढिबरी आदि के प्रयोग में सावधानी बरतें.
रसोई में कोई भी ज्वलनशील पदार्थ न रखें, जैसे मिट्टी तेल, सिंथेटिक कपड़े इत्यादि
ढीली और सिंथेटिक कपड़े न पहले और बालों को खुला न रखें, रसोई घर से बच्चों को दूर रखें.
तेज हवा में खुली जगह पर खाना न पकाएं, यदि संभव हो तो चूल्हे को चारों तरफ से घेर कर रखें.
रात्रि को सोने के समय सभी जलते हुए पदार्थ को बुझा कर ही सोयें.
घर में हमेशा अग्निशामक पदार्थ जैसे – पानी, बालू, सूखी मिट्टी, धूल इत्यादि जमा कर रखें.
हरे पेड़ जैसे केला में अग्नि ताप को कम करने की क्षमता होती है. अत: इसे अपने घर के चारों ओर लगाये.
सभी लोगों को प्राथमिक उपचार की जानकारी होनी आवश्यक है.
सभी लोग आपातकालीन सेवा का फोन नंबर 101 अपने पास अवश्य रखें.
जलती हुई बीड़ी, सिगरेट और माचिस की कांटी खेत-खलिहान में न फेंके.
आगे से बचने के लिए क्या करें
एक बड़े ड्रम में पानी हमेशा भर कर रखें.
कुछ छोटी बाल्टियों में रेत अथवा बालू भी भर कर रखें.
एक दो जूट की पुरानी बोरियों को पानी में भिंगो कर रखे.
रोशनी के लिए बैटरी वाले संयंत्र जैसे टॉर्च, इमरजेंसी लाइट आदि का ही प्रयोग करें.
कई बार खलिहान में पूजा भी की जाती है. पूजा में उपयोग वाले अगरबत्ती, धूप पर तब तक नजर रखें जब क वह बुझ न जाय.
यदि आसपास कोई तालाब या अन्य जलस्रोत हो तो वहां से खलिहान तक का पाइप और पंपसेट तैयार रखें.
क्या कहते हैं अधिकारी
आग लगने की सूचना मिलते ही संबंधित क्षेत्र में स्थित फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल के लिए रवाना हो जाती हैं. आग की भयावहता को देखते हुए जरूरत पड़ने पर जिले के विभिन्न स्थानों पर तैनात गाड़ियों को भी घटनास्थल पर भेजा जाता है. विभाग के पास वाहनों की पर्याप्त संख्या है, मगर ड्राइवरों की थोड़ी कमी है. पानी भरने में गरमी के दिनों में थोड़ी दिक्कत होती है. सीमित संसाधन के बावजूद विभाग जिले में आग पर काबू पाने को हमेशा तत्पर है.
ललन रजक, फायर अफसर, बिहारशरीफ
क्या न करें
थ्रेसर चलाने में उपयोग आने वाले डीजल इंजन या ट्रैक्टर के धुआं वाले पाइप से हवा की दिशा में अनाज का बोझा नहीं रखें.
बिजली के तार के किसी भी जोड़ को ढीला या खुला न छोड़ें.
बिजली के तार के जोड़ों को कभी भी प्लास्टिक से नहीं बांधे.
बिजली के कनेक्शन के लिए कम या खराब गुणवत्ता वाले तार का प्रयोग न करें.
खलिहान के आसपास बीड़ी, सिगरेट न पीयें और न ही किसी को पीने दें.
मुख्यालय के बाद इन जगहों पर भी है फायर ब्रिगेड की गाड़ियां
हिलसादो बड़ी गाड़ियां
राजगीरदो बड़ी एवं एक छोटी गाड़ी
एकंगरसरायएक छोटी गाड़ी
हरनौतएक छोटी गाड़ी
सरमेराएक छोटी गाड़ी
इस्लामपुरएक छोटी गाड़ी
इमरजेंसी में यहां होनी चाहिए पानी की व्यवस्था
बड़ी बिल्डिंंग, मॉल, सिनेमाघर, कोल्ड स्टोरेज, अपार्टमेंट, अस्पताल
अगलगी में कॉल करें
नंबर 101, 06112-235230
