रेपकांड के 15वें मुख्य गवाह आइओ का परीक्षण समाप्त

बिहारशरीफ : चर्चित रेप कांड में आइओ का परीक्षण अपने आप में एक इतिहास बन गया है. इस कांड में आइओ का परीक्षण 42 दिनों के बाद गुरुवार को खत्म हुआ. इस दौरान न्यायालय द्वारा आइओ का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण कुल 95 पेज एवं 153 पारा में रिकार्ड किया गया. जिला न्यायालय के पाक्सो स्पेशल […]

बिहारशरीफ : चर्चित रेप कांड में आइओ का परीक्षण अपने आप में एक इतिहास बन गया है. इस कांड में आइओ का परीक्षण 42 दिनों के बाद गुरुवार को खत्म हुआ. इस दौरान न्यायालय द्वारा आइओ का परीक्षण एवं प्रतिपरीक्षण कुल 95 पेज एवं 153 पारा में रिकार्ड किया गया. जिला न्यायालय के पाक्सो स्पेशल प्रथम एडीजे शशिभूषण प्रसाद सिंह के कोर्ट में नाबालिग छात्रा दुष्कर्म कांड की सुनवाई के दौरान मामले के 15वें गवाह,

अनुसंधानकर्ता एवं महिला थाना की तत्कालीन थानाध्यक्ष मृदुला कुमारी का परीक्षण 23 जनवरी 2017 को शुरू हुआ था तथा 30 जनवरी 2017 से गुरुवार दो मार्च 2017 तक प्रतिपरीक्षण के दौर से उन्हें गुजरना पड़ा. मुख्य परीक्षण का कार्य स्पेशल पीपी सोमेश्वर दयाल, पीपी कैसर इमाम, पॉक्सो एक्ट के स्पेशल पीपी जगत नारायण प्रसाद एवं पीड़िता के अधिवक्ता जीतेंद्र कुमार द्वारा संपन्न कराया गया. वहीं आरोपित नवादा विधायक की ओर से अधिवक्ता वीरेन कुमार एवं कमलेश कुमार ने अनुसंधानकर्ता के

प्रति परीक्षण में मुख्य भूमिका निभाई. गुरुवार को हुए प्रतिपरीक्षण के दौरान मुख्यत: अनुसंधान की कई खामियों को उजागर किया, जिसमें पीड़िता के बख्यितारपुर से घटना स्थल जाने और वहां से निवास तक पहुंचने का गाड़ी नंबर सहित अन्य कोई चर्चा की अनुसंधानकर्ता द्वारा जिक्र न होना.

पीडि़ता के निवास के आस पास तथा घटना स्थल के किसी व्यक्ति का बयान नहीं दर्ज होना. घटना स्थल के भवन का पूरा पहचान न देना. घटना स्थल पर पहुंचने व जांच के दौरान क्षेत्र के किसी संबंधित थाना या अधिकारी को खबर न करना. आरोपी की अंजाने मोबाइल धारक में फोटो द्वारा वर्दी नई मेल पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति में पहचान तथा बयान दर्ज करना.
तथा उपस्थित अधिकारियों का न तो बयान दर्ज और न ही कोई मेमो तैयार करना. अनुसंधान के दौरान बख्यितारपुर के राजीसराय घटना के पूर्व ले जाई गई पीडि़ता से पहचान न कराना. पूरे अनुसंधान क्रम में मामले के द्वितीय अनुसंधानक पुलिस निरीक्षक विनीत कुमार, सिद्धूशेखर, उमेश प्रसाद का न तो बयान दर्ज होना और न ही साक्षी बनाना तथा अन्य निरीक्षकों का भी कोई जिक्र नहीं है. आरोपी राजवल्लभ यादव के बयान पर जो कि रिमांड के समय लिया गया था. कोई हस्ताक्षर नहीं लिया गया. बयान तथा अनुसंधान के अनुसार किसी मोटा काला अधेड़ व्यक्ति के दुष्कर्म को अंजाम दिया था.
जबकि वहां इस रूप के कई व्यक्ति हैं. पीडि़ता का बयान भी न्यायालय में दिये बयान से भिन्न था. प्राथमिकी दर्ज करने व डायरी लिखने तथा जांच से आने जाने के समय भी पूरी तरह कपोल कल्पित है. जबकि कई पेज 10 से 20 मिनट में ही लिखे गये. इसी प्रकार सुलेखा, राधा, छोटी, पुष्पंजय व टुसी पक्ष से अधिवक्ता संजय कुमार व विवेकानंद ने भी प्रतिपरीक्षण किया. जिसमें इन सभी के अपराधिक रिकार्ड अनुसंधान के दौरान पता न करने व आने जाने से संबंधित गाड़ी नंबर, ड्राईवर, आसपास के व्यक्ति का बयान दर्जन नहीं करने पर केंद्रित रहा. पुष्पंजय के नाम कहीं बयान न होने पर पूछताछ के बहाने बुलाकर गिरफ्तार करने
और तत्पश्चात उसका नाम गलत रूप से पीडि़ता के बहन व पिता के बयान में जोड़ा जाना तथा पुष्पंजय के निवास स्थान की जांच व उसके चरित्र या आपराधिक रेकार्ड की जांच तथा अनुसंधान में इसकी चर्चा नहीं की गई. अन्य कई त्रुटियां प्रतिपरीक्षण के दौरान बताई गई. जिस पर आईओ का जवाब था कि या तो दर्ज नहीं किया या उसकी जरूरत नहीं समझी. इस प्रकार से प्रतिपरीक्षण के दौरान अनुसंधान को संदेह के घेरे में रखते हुए आरोपी पक्ष अधिवक्ता का वीरेन कुमार, कमलेश कुमार, संजय कुमार व वीरमणि कुमार को कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि पूरा अनुसंधान ही संदेहास्पद है. इसके अनुसार यह साफ है कि यह मामला बनावटी व राजनीतिक प्रशासनिक दवाब में लाया गया पूर्णत: प्रतीत होता है . जबकि मेडिकल तथा अन्य जांचो के ऐसे अधिकारियों को बयान व साक्षी से हटा दिया गया जो आरोप के खिलाफ थे. आज से एफएसएल टीम के सदस्यों की गवाही शुुरु होगी. जिसमें चार सदस्यों को गवाही के लिए समन किया गय है.

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