बिहारशरीफ : एक तो शारीरिक रूप से अपंग. दूसरी ओर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रमाण पत्र बनाने में करनी पड़ रही मशक्कत. बावजूद अपंगों को जरूरत के अनुसार विकलांगता प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है. प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मूक बधिर एक नहीं दर्जनों इन दिनों सदर अस्पताल में रोज पहुंच रहे हैं. प्रमाण पत्र बनना तो दूर उन्हें जांच करने वाला भी कोई उपलब्ध नहीं है. विकलांगता प्रमाण पत्र फॉर्म लेकर अस्पताल परिसर में ओपीडी अवधि में चक्कर मारे फिरते नजर आते हैं विकलांग.
प्रमाण पत्र को भटक रहे ग्रामीण
बिहारशरीफ : एक तो शारीरिक रूप से अपंग. दूसरी ओर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रमाण पत्र बनाने में करनी पड़ रही मशक्कत. बावजूद अपंगों को जरूरत के अनुसार विकलांगता प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है. प्रमाण पत्र बनवाने के लिए मूक बधिर एक नहीं दर्जनों इन दिनों सदर अस्पताल में रोज […]

ओपीडी में विशेषज्ञ डॉक्टर के आने की प्रतीक्षा करते लोग : मूक बधिर विकलांग लोग हर रोज सदर अस्पताल के नाक, नाक व गला ओपीडी में पहुंचते हैं, पर ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक के बैठने की प्रतीक्षा करते रहते हैं मूक बधिर के मरीज.
ओपीडी में चिकित्सक के आने की जानकारी वहां पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से करते हैं पर कोई भी कर्मी इस दिशा में सही-सही बात बताने को तैयार नहीं हैं. लिहाजा ओपीडी के संचालन की अवधि समाप्त होने के बाद एेसे मरीज निराश होकर घर लौटने को विवश हो जाते हैं. इनमें से बहुत शिक्षित मूक बधिर युवक भी होते हैं जो प्रमाण पत्र बनाने के लिए आते हैं. जिन्हें कई प्रतियोगिता परीक्षा में प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता होती है. लेकिन नाक, कान व गला के चिकित्सक इन दिनों इस ओपीडी में नहीं बैठ पा रहे हैं. बताया जाता है कि महीने दिन से भी अधिक समय से इस ओपीडी में पदस्थापित चिकित्सक नहीं आ रहे हैं.
चिकित्सा में भी परेशानी : नाक, कान व गला ओपीडी में डॉक्टर के नहीं बैठने से इससे जुड़े रोगियों को अपनी बीमारी का इलाज करने में भी फजीहत उठानी पड़ रही है. इन रोग के मरीजों को अपनी बीमारी की चिकित्सा शहर के निजी नाक, कान व गला रोग विशेषज्ञ के पास जाकर करानी पड़ रही है. जहां आर्थिक रूप से संपन्न लोग निजी चिकित्सक के पास सहज रूप से इलाज तो करा लेते हैं पर गरीब, गुरबे तबके के मरीज चाहकर भी प्राइवेट क्लिनिक में फीस जमा कर बीमारी की चिकित्सा कराने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. सबसे अधिक फजीहत मूक व बधिर रोगियों को विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने में परेशानी उठानी पड़ रही है. इएनटी के अभाव में प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है. इसके लिए मरीज यहां से लेकर पटना तक की दौड़ लगा रहे हैं. ताकि विकलांगता प्रमाण पत्र बन जाय और जरूरत की जगहों पर इसका उपयोग हो सके.
क्या कहते हैं अधिकारी
सदर अस्पताल के नाक, कान व गला विभाग में पदस्थापित डॉक्टर के ओपीडी में नहीं आने की सूचना स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को दे दी गयी है. नेत्र ओपीडी के चिकित्सक ही नाक, कान व गला के रोगियों का इलाज करते हैं. उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को चिकित्सा सेवा प्रदान की जा रही है.
डॉ सुबोध प्रसाद सिंह, सिविल सर्जन, नालंदा