सामाजिक स्तर पर लोगों को आगे बढ़कर सहयोग करें
हरनौत़ : स्थानीय प्रखंड के तीन गांवों को बाल श्रम मुक्त एवं बाल संवेदनशील गांव घोषित किया गया. प्रखंड के कोलावां पंचायत के करीमचयक वलवा, बराह पंचायत के महथवर एवं पचौरा पंचायत के सादिकपुर गांव को बाल श्रम व बाल संवेदनशील ग्राम घोषित किया गया. प्रखंड परिसर स्थित सभागार भवन में सेव द चिल्ड्रन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में इसकी घोषणा मंगलवार को किया गया. जिला बाल संरक्षण के सहयाक निर्देशिका नेहा नूपुर ने बताया कि आज बाल श्रम एक राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना है. पैसे के लालच में लोग अपने अपने बच्चों को दूसरे के हाथ में सौंप रहे हैं. उनका मानसिक व शारीरिक शोषण किया जाता है.
कम उम्र के बच्चों से 12 से 16 घंटे तक काम लिया जाता है. जिससे उस बच्चे का बचपन बर्बाद हो जाता है. इसका खामियाजा बच्चे को जीवन भर भुगतना पड़ता है. काम करने वाले बच्चों के हाथ में किसान और खेल का समान होना चाहिए. तब जाकर पूर्ण रूप से बाल श्रम मुक्त बिहार बनेगा. इसके लिए सामाजिक स्तर पर लोगों को आगे बढ़कर सहयोग करना चाहिए. क्योंकि बाल श्रम मुक्त करना एक चुनौत्ी है. बाल श्रम मुक्त ग्राम घोषित करने के बाद सहयोग करने वाले पंचायत के मुखिया, प्रधान शिक्षक, जीविका के दीदी, आशा एवं आंगनबाड़ी सेविका को भी प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया.
साथ ही अपने बच्चों से न दूसरे के बच्चे से काम करवाने की शपथ भी दिया गया.
इस मौके पर बाल श्रम सुरक्षा पदाधिकारी सुरेन्द्र कुमार, प्रखंड श्रम पदाधिकारी अरबिंद कुमार, बराह पंचायत के मुखिया हेमलता सिन्हा, पचौरा के मुखिया रामप्रवेश पासवान, गोनावां के पूर्व मुखिया राजीव रंजन सिंह समेत सैकड़ों जीविका की महिलाएं मौजूद थे
