सरकार पर यूनिवर्सिटी को निशाना बनाने का आरोप
बिहारशरीफ : 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की 159वीं वर्षगांठ पर आइसा व इनौस द्वारा शहर में मार्च निकाला गया. इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के दिन ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ भारत में विद्रोह की शुरुआत हुई थी. इस संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मजदूर-किसान, सभी धर्मों व वर्गों के लोग शामिल थे. आज केंद्र की मोदी सरकार द्वारा 1857 की विरासत पर हमला कर दलितों, अल्पसंख्यकों व यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया जा रहा है. आज अभिव्यक्ति एवं असहमति की आवाज को दबाया जा रहा है.
जेएनयू के छात्र 13 दिन से आमरण अनशन पर बैठे हैं, पर मानव संसाधन मंत्री स्मृति इरानी के दबाव में अभी तक उनसे वार्ता नहीं की गयी है. इस अभियान का दूसरा चरण नौ अगस्त, 2016 तक चलेगा. पूरे देश के युवाओं द्वारा आंदोलन चला कर सांप्रदायिक फासीवाद को रोका जायेगा. मौके पर मनमोहन, इनौस के जिलाध्यक्ष अमिश पटेल, रामप्रीत केवट, दयानंद कुमार, किशोर साव, मंती देवी, रेणु देवी, सुनील पासवान, माले के मकसूदन शर्मा, पाल बिहारी लाल, शजीवन मांझी आदि शामिल थे.
