दो लाख बीपीएल परिवार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से वंचित
सितंबर माह तक किया गया है अवधि विस्तार
बिहारशरीफ:जिले के दो लाख बीपीएल परिवार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभ से वंचित है़ योजना की अवधि विस्तार तो कर दी गयी, लेकिन बीपीएल परिवार का कार्ड नहीं बनाया जा सका है. कार्ड नहीं होने से इलाज से गरीब परिवार वंचित है. सरकार द्वारा योजना के तहत इलाज करने के लिए अनुबंधित बीमा कंपनी की अवधि विस्तार सितंबर माह तक कर दिया गया है. अवधि विस्तार करने के बाद किसी प्रकार का प्रचार-प्रसार भी नहीं किया गया,साथ ही वंचित परिवार के सदस्यों का स्मार्ट कार्ड नहीं बनने से योजना का पूर्ण लाभ मिलना मुश्किल है.
चार लाख है जिले में बीपीएल परिवार:
जिले में चार लाख बीपीएल परिवार हैं जिसमें से एक लाख 95 हजार बीपीएल परिवार का ही स्मार्ट कार्ड वर्ष 2015 में बनाया गया था. कार्ड के आधार पर एक साल तक फरवरी 2016 तक इलाज किये जाने की घोषणा की गयी थी. बाद में और छह माह के लिए बीमा कंपनी का अवधि विस्तार सितंबर तक कर दिया गया है. नया कार्ड नहीं बनने से वैसे परिवार सेवा के लाभ लेने के लिए कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सही जानकारी किसी के द्वारा नहीं दी जा रही है.
चिकित्सकों का भी नहीं किया जा रहा भुगतान:
इस योजना से जुड़े चिकित्सकों को भी इलाज के ऐवज में भुगतान बीमा कंपनी द्वारा नहीं की जा रही है. इससे चिकित्सकों में भारी नाराजगी है. चिकित्सक बताते हैं कि किसी को 15 तो किसी को 20 फीसदी राशि का ही भुगतान किया गया है .
कार्रवाई से चिकित्सक भयभीत:
वर्ष 2012 के यूटेरेस ऑपरेशन मामले की फिर से जांच होने से योजना से जुड़े चिकित्सक भयभीत हैं. उक्त साल में इलाज के 25 फीसदी से अधिक के मामले में सिर्फ यूटेरस निकालने के थे.
जांच के दौरान खुलासा हुआ था कि बिना ऑपपेशन किये ही पैसे की निकासी कर ली गयी थी.
मानवाधिकार आयोग का आदेश पर दोषी पर कार्रवाई की जा रही है. डीएम ने सीएस व डीआरडीए के डायरेक्टर को आदेश दिया है कि मामले की जांच कर कार्रवाई करें.
क्या है राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना:
गरीबों का इलाज बेहतर निजी क्लीनिकों में हो इसके लिए स्वास्थ्य बीमा येाजना चलायी गयी है. इसके तहत बीपीएल परिवार का स्मार्ट कार्ड बनाये जाते हैं. कार्ड के आधार पर एक साल तक संबंधित क्लीनिकों में 30 हजार रुपये तक का मुफ्त में इलाज किये जाने का प्रावधान है. इस योजना की अवधि को एक साल से डेढ़ साल कर दिया गया है.
अवधि विस्तार तो कर दिया गया लेकिन पूर्ण जानकारी गरीबों तक पहुंचाने का काम न तो प्रशासन कर रहा है न ही बीमा कंपनी. बीमा कंपनी तो विस्तार का लाभ ले रही है लेकिन गरीब नहीं ले पा रहे इससे योजना से जुड़े चिकित्सकों का कहना है कि मरीजों को किसी तरह की जानकारी नहीं होने के कारण ही इलाज कराने वाले लोगों की संख्या नहीं के बराबर है .
छह चिकित्सकों पर हुई कार्रवाई
इस प्रकरण के दोषी छह निजी क्लीनिकों के चिकित्सकों पर एफआइआर अब तक हो चुकी है. साथ ही चिकित्सकों का लाइसेंस रद्द करने की भी अनुशंसा की गयी है.
