लचर व्यवस्था . जिले के पशु अस्पतालों की स्थिति बदतर
पशुओं की सेहत की देखभाल और इलाज के लिए जिले में 35 चिकित्सक चाहिए और वतर्मान में फिलहाल केवल 27 चिकित्सक ही जिले में पदस्थापित हैं. इस स्थिति में बीमार पशुओं का बेहतर इलाज कैसे हो पायेगा.
बिहारशरीफ : पशुओं की सेहत की देखभाल और इलाज के लिए जिले में 35 चिकित्सक चाहिए और वतर्मान में फिलहाल केवल 27 चिकित्सक ही जिले में पदस्थापित हैं. इस स्थिति में बीमार पशुओं का बेहतर इलाज कैसे हो पायेगा. यह हाल है जिले के पशु चिकित्सालयों का. जिन अस्पतालों में डॉक्टर के पद रिक्त हैं.
वहां के पशुपालकों को अपने बीमार पशुओं को इलाज कराने में इन दिनों खासे परेशानी झेलनी पड़ रही है. संबंधित क्षेत्र के पशुपालकों को बीमार पशुओं के इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. गांव -कस्बों में रहने वाले पशुपालक नीम-हकीमों के रहमोकरम पर निर्भर रहने को विवश हैं.
कई नवसृजित अस्पतालों में चिकित्सकों के पद खाली पड़े हैं. . लिहाजा जिला पशुपालन विभाग के अधिकारियों को और भी दिक्कत महसूस हो रही है. जिन नवसृजित अस्पतालों में पद रिक्त हैं .वहां पर जिला पशुपालन विभाग अपने स्तर से व्यवस्था कर रखी है. यानी की अस्पतालों में पदस्थापित अन्य चिकित्सकों को वहां की अतिरिक्त जिम्मेवारी सौंपी गयी है.
जिले में 35 पशु अस्पताल हैं
संचालित : पशुओं को बेहतर इलाज के लिए जिले में कुल 35 अस्पताल हैं. जिसमें से 12 नवसृजित प्रथमवर्गीय पशु अस्पताल भी शामिल हैं. इन अस्पतालों में पशुओं के इलाज के लिए 35 चिकित्सक होने चाहिए.लेकिन अभी मात्र 27 पशु चिकित्सक ही विभिन्न पशु अस्पतालों में पदस्थापित हैं. इस तरह जिले में आठ पशु अस्पतालों में पशु चिकित्सक के पद रिक्त पड़े हैं. लिहाजा रिक्त अस्पतालों के क्षेत्रों के पशुपालकों को पशुओं को इलाज कराने में खासे परेशानी हो रही है.
इन अस्पतालों में डॉक्टर नहीं : जिले के आठ अस्पतालों में पशु चिकित्सक के पद खाली पड़े हैं. जिले के नदिऔना,बेलछी,खुदागंज,मुजफराबाद,कल्याणबिगहा,अहियापुर,रहुई,हरनौत में पशु भ्रमणशील पशुचिकित्सा पदाधिकारी के पद खाली पड़े हैं.
