बिहारशरीफ से राजगीर : एक बात तो माने पड़तो कि टक्कर जबरदस्त है

बिहारशरीफ स्टेशन पर करीब साढ़े ग्यारह बजे दानापुर -तिलैया ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर आ कर रुकती है. बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन पर चढ़ने के लिए दौड़ते हैं. थोड़ी देर भी सभी यात्री ट्रेन पर सवार हो जाते हैं जहां जिसको मिलती है बैठ जाते हैं. ट्रेन रफ्तार पकड़ने लगती है. इसी दौरान एक […]

बिहारशरीफ स्टेशन पर करीब साढ़े ग्यारह बजे दानापुर -तिलैया ट्रेन प्लेटफार्म नंबर एक पर आ कर रुकती है. बड़ी संख्या में यात्री ट्रेन पर चढ़ने के लिए दौड़ते हैं. थोड़ी देर भी सभी यात्री ट्रेन पर सवार हो जाते हैं जहां जिसको मिलती है बैठ जाते हैं. ट्रेन रफ्तार पकड़ने लगती है. इसी दौरान एक व्यक्ति बैग लिये हुए वहां पहुंचते हैं.
सीट पर बैठा एक व्यक्ति बोल उठता है आइये रामजी बाबू यहां बैठिये. राजगीर के कैलाश प्रसाद पूछते हैं कि बताइये रामजी बाबू आपके यहां चुनाव का क्या हाल है. रामजी बाबू कहते हैं कि एनडीए व जदयू महागंठबंधन में कांटे की टक्कर मानिए. सिलाव के राधे लाल कह उठते हैं कि नालंदा में सातो विधानसभा क्षेत्रों में दोनों गंठबंधनों में सीधी टक्कर है. इसीबीच राजगीर के विशुनदेव प्रसाद कहते हैं कि दोनों गंठबंधनों को बागियों व निर्दलीय प्रत्याशियों ने परेशानी में डाल दिया है.
इसी बीच ट्रेन पावापुरी हॉल्ट पर रुकती है और कुछ लोग अपना सामान लेकर उतरने की तैयारी करने में लगते हैं. चर्चा रुक जाती है. ट्रेन खुलती है तो चर्चा फिर शुरू हो जाती है. हरनौत के शैलेन्द्र कुमार कहते हैं कि विकास ही इस बार का चुनावी मुद्दा है. नेता लोग चाहे जितना अनाप-शनाप बोल लें, पिब्लक अपने हिसाब से ही वोट देगी.
वे तर्क देते हैं कि स्कूलों की स्थिति सुधरी, बिजली की स्थिति सुधरी, सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है. बाढ़ से अपने घर लौट रहे राजगीर के रघुनंदन व मालती देवी अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहते हैं कि चुनाव में जीत हार जिसकी भी हो, मगर किसका पलड़ा भारी है. लोगों को कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है. कभी नीतीश पर नमो भारी पड़ रहे हैं तो कभी प्रधानमंत्री से अच्छा नीतीश का काम लग रहा है. मगर यह समझना मुश्किल है कि कौन किधर वोट करेगा. बीच में एक जगह ट्रेन थाड़ी देर के लिए रुकती है. मगर यहां यात्री चढ़ने वाले नहीं है. इसलिए चर्चा में व्यवधान पैदा नहीं होता है.
तिलैया जा रहे बिहारशरीफ के मो. फैयाज कहते हैं कि इस चुनाव में हर कोई जीत का दावा कर रहा है. वोट कुछ बोलने के बजाय केवल सुन रहे हैं. 10:30 मिनट पर सिलाव स्टेशन पर रूकती है. हॉकर खाजा है, खाजा है कि आवाज देते हैं. ट्रेन पर बैठे एक यात्री पूछते हैं कि कैसे है भइया. अच्छा है ना. हॉकर कहता है सिलाव का विश्व प्रसिद्ध खाजा है. खा कर देखिये तब पैसा दीजिएगा. यहां पर ट्रेन पर दो महिलाएं सवार होती हैं. दोनों महिलाएं पास ही में खाली पड़ी सीट पर आ कर बैठ जाती है. ट्रेन फिर सरकने लगती है.
चर्चा फिर शुरू हो जाती है. अपने को मिडिल स्कूल की प्रधानाध्यापिका बता महिला कहती है कि बिहारशरीफ राजगीर, इस्लामपुर सीट पर मुकाबला बहुत कड़ा है. परबलपुर बाजार देवव्रत कहते हैं कि एक भाई! कोई नहीं कह सकलो है कि कौन जीततो, टक्कर बड़ा जबरदस्त हो. दूध ले जा रहे अशोक यादव बोल पड़ते हैं कि जे जीततो, थोड़े-बहुत वोट से जीततो. ट्रेन की गति धीमी हो जाती है. ट्रेन की सीटी बजने लगती है. लगता है कि राजगीर स्टेशन पहुंचने को है.
कुछ लोग अपने झोला-बैग व पानी की बोतल का एक जगह कर उतरने की तैयारी करने लगते हैं. 10:40 हुए है. ट्रेन राजगीर स्टेशन पर रूकती है. कई यात्री यह कहते हुए चर्चा को छोड़ चल पड़ते हैं कि अब समय बतायेगा, हमलोगों के कहने बोलने से नहीं होगा. मतदाता मन में ठान चुके हैं.

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