किसानों को फसल की नेताओं को वोट की चिंता

बिहारशरीफ : मॉनसून की दगाबाजी से परेशान किसान इन दिनों नेताओं के बेसमय आवाजाही से ज्यादा परेशान हैं. बारिश न होने की वजह से धान की फसल सूखने को लेकर परेशान किसान अपनी जमा पूंजी डूब जाने के भय से अधमरा सा हो गये हैं. फसल बचाने की चिंता किसानों को खाये जा रही है. […]

बिहारशरीफ : मॉनसून की दगाबाजी से परेशान किसान इन दिनों नेताओं के बेसमय आवाजाही से ज्यादा परेशान हैं.

बारिश न होने की वजह से धान की फसल सूखने को लेकर परेशान किसान अपनी जमा पूंजी डूब जाने के भय से अधमरा सा हो गये हैं. फसल बचाने की चिंता किसानों को खाये जा रही है.

इस स्थिति में बिहार विधान सभा के चुनाव को लेकर नेताओं का इन किसानों का घर आना-जाना तेज हो गया है. नेताजी आकार किसानों के दुख-दर्द जाने बगैर उसने वोट देने व जीताने की अपील कर लगते हैं.
इससे किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है. किसान अपना गुस्सा समय-कुसमय मिलने आ रहे नेताओं पर उतार रहे हैं. किसान इस बात से खासे नाराज हैं कि चुनाव जीतने के बाद उन्हें कभी मिलने की फुर्सत नहीं मिलती है.
वे किस टाल में हैं और उन्हें क्या परेशानी है. इसको दूर करने की चिंता कभी नहीं रही. कभी दुख-दर्द में भी मिलने नहीं आते. अब जब चुनाव का वक्त आया है तो वे देर रात तक दरवाजा खटखटा रहे हैं. जब आते भी हैं तो वे केवल अपनी बात कहते हैं.
किसानों की परेशानी से उन्हें कोई लेना देना नहीं होता है. इस संबंध में किसान विलास महतो, अरविंद सिंह, महेश्वर प्रसाद, कमलेश कुमार, साधु जी आदि बताते हैं कि आज के नेता इतने स्वार्थी हो गये हैं कि उन्हें केवल अपनी भलाई की चिंता है. किसान किस हालत में हैं. इसकी चिंता उन्हें कभी नहीं रही.
मॉनसून की दगाबाजी के कारण किसान जैसे-तैसे करके धान की फसल बचाये हैं. धान की फसल को बचाये रखने के लिए किसान पैसा धूएं में उड़ा रहे हैं. जब फसल में वाली फूट रही है तो खेतों में पानी नहीं है. फसल पर रोग व्याधि का प्रकोप काफी बढ़ गया है. ऐसी स्थिति में किसान अपनी जमा पूंजी डूबने को लेकर परेशान हैं. जबकि नेताजी को अपनी विजयी की चिंता सता रही है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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