बिहारशरीफ. हम सभी इस बात को मानते हैं कि जरूरत अाविष्कार की जननी है. नूरसराय बाजार आज इसी बात को चरितार्थ कर रहा है. किसानों के उपयोग के लिए कृषि यंत्रों के निर्माण के लिए नूरसराय बाजार पहले से ही सूबे में प्रसिद्ध है. यहां सूबे के हर जिलों से लोग कृषि यंत्र की खरीदारी करने के लिए आते हैं. यहां के बने कृषि यंत्र इस क्षेत्र के नामी- गिरामी कंपनियों को टक्कर दे रहे हैं.
कंपनियों में बनने वाले नये कृषि यंत्र पहले नूरसराय बाजार में बनकर तैयार हो जाते हैं. टिकाऊ व कीमत ऐसी की नामी-कंपनियों के भी पसीने छूट जाते हैं. किसान कृषि यंत्र खरीदने में यहां के बने कृषि को अहमियत दे रहे हैं. इसका कारण यह है कि किसानों की जरूरत और डिमांड के हिसाब से यहां कृषि यंत्र तैयार किये जाते हैं. इससे किसानों को अधिक लाभ होता है. कृषि के अलावा अन्य क्षेत्रों के लिए यहां अनेक उपयोगी यंत्र तैयार किये जा रहे हैं.
पोल इरेक्शन मशीन आकर्षण का केंद्र : इन दिनों नूरसराय बाजार में पोल इरेक्शन मशीन तैयार की जा रही है, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
मधेपुरा व सिवान जिले के लोग यहां आकर बिजली लाइन के निर्माण में पोल गाड़ने के लिए गड्ढे की खुदाई करने और उसमें पोल डालकर उसे सीधा खड़ा करने में लगने वाले मजदूर व समय से परेशान होकर नूरसराय बाजार में यंत्रों के निर्माण में लगे कारीगरों को अपनी परेशानी बतायी. इस समस्या से निदान के लिए कोई यंत्र निर्माण करने की बात कही. नूरसराय बाजार स्थित कृषि यंत्रों के निर्माता राजेश विश्वकर्मा ने उनकी परेशानी दूर करने के लिए मशीन निर्माण करने का आश्वासन दिया. ऑर्डर मिलने के बाद राजेश विश्वकर्मा पोल इरेक्शन मशीन तैयार कर रहे हैं.
पोल इरेक्शन मशीन में एक ट्रैक्टर का प्रयोग होता है, जो ऑर्डरकर्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. इस ट्रैक्टर के अगले हिस्से में पोल को उठाने के लिए मशीन तैयार की जाती है और ट्रैक्टर के पिछले हिस्से में गड्ढा खोदने की मशीन तैयार कर लगायी जाती है.
मशीन तैयार होने के बाद डोजर जैसा आकार का दिखायी पड़ता है. ट्रैक्टर को छोड़कर इस मशीन के निर्माण में 2.50 लाख से लेकर 3 लाख रुपये तक खर्च आता है. तैयार मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब जरूरत हो, तब इसे ट्रैक्टर से आसानी से अलग किया जा सकता है.इस पोल इरेक्शन मशीन की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि यह पांच मिनट के अंदर गड्ढे खोदकर पोल खड़ा कर देता है.
पोल गाड़ने के लिए पहले जहां दस मजदूरों की जरूरत पड़ती थी और दिनभर में तीन से चार पोल ही गाड़े जाते थे, इस नयी मशीन से पोल गाड़ने के लिए केवल दो मजदूरों की जरूरत पड़ेगी. दिनभर में कई दर्जन पोल खड़ा कर दिये जायेंगे. इस मशीन का उपयोग खासकर विद्युतीकरण के काम में किया जायेगा.
