विभाग से एनओसी लिये बिना बन रहे स्ट्रक्चर

निर्माण के समय नेचुरल ड्रेनेज सिस्टम का नहीं रखा जा रहा ख्याल बिहारशरीफ : जिले में जितने भी स्ट्रˆक्चर पर काम हो रहे हैं, उनमें नेचुरल ड्रेनेज सिस्टम का ना तो ध्यान रखा जा रहा है और ना ही जल संसाधन विभाग से एनओसी लिया जा रहा है. इसके कारण कई प्रकार की समस्या पैदा […]

निर्माण के समय नेचुरल ड्रेनेज सिस्टम का नहीं रखा जा रहा ख्याल

बिहारशरीफ : जिले में जितने भी स्ट्रˆक्चर पर काम हो रहे हैं, उनमें नेचुरल ड्रेनेज सिस्टम का ना तो ध्यान रखा जा रहा है और ना ही जल संसाधन विभाग से एनओसी लिया जा रहा है. इसके कारण कई प्रकार की समस्या पैदा हो रही है. जिले में अब तक इस तरह की दो बड़ी समस्याएं पैदा हो चुकी है. दो दिन पूर्व हुई बारिश के दौरान नालंदा यूनिवर्सिटी की बाउंड्री पानी से भर गयी, तब जिलाधिकारी ने सूचना मिलने पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता को मौके पर भेज कर समस्या का निदान करने को कहा गया.
जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता जयदेव प्रसाद इंजीनियरों की टीम के साथ नालंदा यूनिवर्सिटी के प्रांगण पहुंचे. उन्होंने यूनिवर्सिटी के बांउड्री वॉल के अंदर जलजमाव होने के कारणों की पड़ताल की तो पता चला कि इतने बड़े स्ट्रक्चर में ड्रेनेज सिस्टम नहीं है. राजगीर रेलवे लाइन में तीन कन्वर्टर है तथा रोड में भी तीन कन्वर्टर है. यूनिवर्सिटी का बाउंड्री वॉल पहाड़ की तलहटी में अवस्थित है. यहां नेचुरल पानी के निकास की व्यवस्था नहीं है. नेचुरल पानी के निकास को चौक कर दिया गया. यूनिवर्सिटी के लोगों का कहना था कि तीन कन्वर्टर के पानी को बाउंड्री वॉल के बाहरी छोर के बगल से होते हुए निकाल दें.
इसी प्रकार हरनौत के पोआरी गोनावां रोड में नदी में बनाये गये स्ट्रˆर में पानी के निकास के लिए पंचाने नदी में दो ह्यूम पाइप लगा दिया गया है. इसके कारण पंचाने नदी के पानी के नेचुरल बहाव में अवरोध पैदा हो गया. इससे पोआरी गांव के लोगों के धान की फसल डूब गयी व पानी घर में घुसने लगा. ग्रामीणों ने इसकी शिकायत डीएम डॉ. त्याग राजन से की. डीएम के आदेश के बाद जल संसाधन विभाग के इंजीनियर पोआरी गांव पहुंच कर पानी रूकने की पड़ताल की तो ड्रेनेज सिस्टम को दोषी पाया. विभाग ने फिलहाल अस्थायी व्यवस्था कर दी है. जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि कोसुक के पास पंचाने नदी में बन रहे रिवर फ्रंट में ीाी शुरूआत में पानी के निकास पर पड़ने वाले प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया गया था. उन्होंने बताया कि बड़े स्ट्रˆर के काम शुरू करने से पूर्व जल संसाधन विभाग से एनओसी लेने को अनिवार्य बनाया जाना जरूरी है. बिना विभाग से एनओसी लिये निर्माण कार्य किये जाने पर बाद में कई तरह की समस्याएं पैदा हो जाती है, तब जल संसाधन विभाग को इसका समाधान निकालना पड़ता है, जो काफी खर्चीला हो जाता है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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