मिडिल ईस्ट में आ रहा US का आसमानी राक्षस और UK का ऑक्टोपस, Iran पर पडे़गी दोहरी मार!

Iran War: ईरान के खिलाफ युद्ध में अब तक ब्रिटेन शामिल नहीं हुआ था. लेकिन अब उसने अपने ऑक्टोपस इंटरसेप्टर को तैनात करने की तैयारी कर रहा है. वहीं अमेरिका ने बीती रात अपने बमवर्षक विमान B-52 Stratofortress को ईरान के आस-पास भेज दिया है.

Iran War: ईरान युद्ध में अब अमेरिका अपने और भी घातक हथियारों की तैनाती शुरू कर रहा है. यूएस नेवी के दो एयरक्राफ्ट कैरियर पहले ही फारस की खाड़ी के पास मौजूद हैं. तीसरा जहाज मेडिटेरेनियन में है, इसके बावजूद जापान से यूएसएस त्रिपोली को ईरान के पास तैनाती के लिए भेजा गया है. इसी बीच यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि अमेरिकी एयरफोर्स का एक B-52 Stratofortress बमवर्षक विमान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत रात के मिशन पर रवाना हुआ. वहीं ब्रिटेन भी अपने हथियारों की तैनाती की योजना बना रहा है. 

CENTCOM ने कहा कि अमेरिकी सेना की ओर से किए जा रहे हमले लगातार अप्रत्याशित, तेज़ और निर्णायक बने हुए हैं. B-52 Stratofortress अमेरिकी वायुसेना का लंबी दूरी तक मार करने वाला एक रणनीतिक बमवर्षक विमान है, जिसे शीत युद्ध के दौर में बोइंग ने विकसित किया था. 1955 से यह लगातार अमेरिकी सेना की सेवा में है. आठ टर्बोफैन इंजनों से लैस यह भारी विमान बिना बीच में ईंधन भरे लगभग 14,000 किलोमीटर तक उड़ान भर सकता है और हवा में ईंधन भरने की सुविधा के साथ इससे भी अधिक दूरी तय कर सकता है. 

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक और परमाणु, दोनों प्रकार के हथियार ले जाने में सक्षम है. इनमें क्रूज मिसाइल, स्मार्ट बम और भारी बम शामिल हैं. करीब 31 मीटर पंखों की चौड़ाई और लगभग 220 टन अधिकतम टेक-ऑफ वजन के साथ यह विमान लंबी दूरी के सटीक हमलों, रणनीतिक बमबारी और निगरानी अभियानों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. 

ब्रिटन से आ रहे ‘ऑक्टोपस’ इंटरसेप्टर एंटी-ड्रोन सिस्टम

उधर कीर स्टारर्मर की सरकार भी मध्य पूर्व में हजारों इंटरसेप्टर ड्रोन तैनात करने पर विचार कर रही है. शनिवार को प्रकाशित द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन के रक्षा अधिकारी इस संभावना का आकलन कर रहे हैं कि पूर्वी यूरोप के लिए तैयार किए गए अत्याधुनिक उपकरणों को नए क्षेत्रीय हालात के अनुसार मध्य पूर्व भेजा जा सकता है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि सैन्य विशेषज्ञ यह जांच रहे हैं कि यूक्रेन को रूस के हमलों से बचाने के लिए ब्रिटेन में तैयार किया गया ‘ऑक्टोपस’ इंटरसेप्टर एंटी-ड्रोन सिस्टम, ईरान के शाहेद ड्रोन से सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं. ड्रोन तैनाती पर यह विचार ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूके समेत अन्य सहयोगी देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री रास्तों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसैनिक ताकत तैनात करने की अपील की है.

पश्चिम एशिया में संघर्ष लगातार फैलता जा रहा है, जहां अमेरिका, इजरायल और ईरान एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना रहे हैं. इससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर भी खतरा मंडराने लगा है. अमेरिका का इस अभियान का मकसद ईरानी ‘शासन’ से पैदा होने वाले खतरों को खत्म करना और भविष्य में ईरान को अपनी सैन्य क्षमताएं फिर से खड़ी करने से रोकना बताया गया है. 

ईरान लगातार कर रहा पलटवार

वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा कि अगर क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा चाहिए तो अमेरिका को पश्चिम एशिया से बाहर जाना होगा. सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, ‘संक्षेप में कहें तो क्षेत्र को सुरक्षित बनाने के लिए अमेरिका का यहां होना नहीं चाहिए.’ इस बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की 51वीं लहर के तहत क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों की बौछार की है. 

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सरकारी चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक यह हमला अमेरिका और इजरायल की जारी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में किया गया. IRGC ने कहा कि इस चरण में तरल ईंधन और ठोस ईंधन दोनों तरह की मिसाइलों का रणनीतिक मिश्रण इस्तेमाल किया गया. इन मिसाइलों को सऊदी अरब में अल खर्ज वायु सेना अड्डा में तैनात अमेरिकी सैन्य बलों को निशाना बनाकर दागा गया. हालांकि, इसकी वजह से कोई नुकसान नहीं हुआ, सऊदी वायु रक्षा ने इसे इंटरसेप्ट करते हुए विफल कर दिया. 

एएनआई के इनपुट के साथ.

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By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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