हाइटेक ठगों की धरपकड़ को पुलिस के पास सॉफ्टवेयर नहीं

बड़े मामलों में केवल फोन नंबर ही हासिल कर पाती है पुलिस बिहारशरीफ : साइबर अपराध से जुड़े अपराधियों की गिरफ्तारी का ग्राफ काफी छोटा है. इसका सबसे बड़ा कारण जिले में साइबर सेल यूनिट का नहीं होना है. इसके अलावा जिले में साइबर थाना भी नहीं है. इस तरह के अपराध में संलिप्त गिरोह […]

बड़े मामलों में केवल फोन नंबर ही हासिल कर पाती है पुलिस

बिहारशरीफ : साइबर अपराध से जुड़े अपराधियों की गिरफ्तारी का ग्राफ काफी छोटा है. इसका सबसे बड़ा कारण जिले में साइबर सेल यूनिट का नहीं होना है. इसके अलावा जिले में साइबर थाना भी नहीं है. इस तरह के अपराध में संलिप्त गिरोह को दबोचने को लेकर पुलिस के पास कोई अपग्रेट सॉफ्वेयर वर्जन भी नहीं है. इसके अभाव में राज्य में हाइटेक तरीके से ठगी करने वाले शातिर अपराधियों पर पुलिस शिकंजा नहीं कस पा रही है. बड़े ठगी के प्रकरणों में केस दर्ज कर मामले की फाइल थाने में दबी रह जाती है. पुलिस जांच कर केवल मोबाइल नंबरों का पता लगाने तक ही सिमटी रहती है.
100 से ज्यादा साइबर क्राइम के मामलों की जांच का दबाव फिलहाल पुलिस के पास है. दरअसल साइबर ठग फर्जी फोन नंबर और बैंक खातों से ठगी कर रहे हैं. इन तक पहुंच पाने व क्लू जुटाने की परेशानी पुलिस के पास रहती है. हाल में साइबर ठगों द्वारा विभिन्न परीक्षा में उत्तीर्ण करने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी पटना सहित सूबे के विभिन्न जिलों से की गयी. मामला काफी संगीन था, इसलिए पटना व नालंदा पुलिस के सहयोग से जिले के कतरीसराय व शेखपुरा से इसके गुनाहगार पकड़े गये. हालांकि ठगी से संबंधित कई ऐसे मामले भी पुलिस के संज्ञान में आते हैं, जहां फर्जी फोन नंबर और बैंक खातों के बारे में पता लगाने में पुलिस उलझ कर रह जाती है. अज्ञात ठगों का पता नहीं चल पाता है. इधर पूर्व में सामने आये कई इस तरह के प्रकरण की जांच पर्याप्त सुविधा के अभाव में बंद ही पड़ी है. पुलिस ऐसे मामलों में सिर्फ संबंधित ठगों का मोबाइल नंबर ही ट्रेस कर पाती है. जांच के बाद मोबाइल का सिम भी फर्जी पते पर होने की बात सामने आती है. हालांकि पिछले चार माह के भीतर जिले के कतरीसराय थाना पुलिस द्वारा करीब दो दर्जन से अधिक साइबर ठगों की गिरफ्तारी विभिन्न उपकरणों के साथ की गयी.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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