चाइल्ड व एमबी रोगियों पर कर्मी रखें विशेष नजर

बिहारशरीफ : कुष्ठ के चाइल्ड व एमबी रोगियों पर विशेष नजर रखी जाये. जिस इलाके में इसके मरीज प्रतिवेदित होते हैं, उन्हें अविलंब इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. समय पर इलाज कराने से रोग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सकता है. साथ ही समाज में इस रोग के फैलाव होने से रोका […]

बिहारशरीफ : कुष्ठ के चाइल्ड व एमबी रोगियों पर विशेष नजर रखी जाये. जिस इलाके में इसके मरीज प्रतिवेदित होते हैं, उन्हें अविलंब इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. समय पर इलाज कराने से रोग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सकता है. साथ ही समाज में इस रोग के फैलाव होने से रोका जा सकता है. कर्मी इस पर हमेशा अपनी पैनी नजर रखें. जिला लेप्रोसी कार्यालय में आयोजित मासिक बैठक में जिले के नॉन मेडिकल स्टॉफों व पारा मेडिकल वर्करों को यह टास्क चिकित्सा पर्यवेक्षक उमेश प्रसाद ने दिया. उन्होंने उक्त कर्मियों को यह भी टास्क दिया कि क्षेत्र में चिह्नित कर सही लाभुकों को विकलांगता पेंशन उपलब्ध कराएं.

पेंशन के लिए लाभुकों की सूची बनाकर संबंधित पदाधिकारी के पास आवेदन को समय पर जमा कराएं, ताकि लाभुकों को इसका समय पर लाभ मिल सके. उन्होंने कर्मियों को निर्देश दिया कि कुष्ठ रोग से हुए विकलांगों की पहचान कर सूची बनायी जाये, ताकि सरकार की ओर से उपलब्ध करायी जाने वाली कुष्ठ विकलांगता पेंशन का लाभ इन मरीजों को मिल सके. चिह्नित होने वाले लोगों को यदि विकलांगता प्रमाणपत्र नहीं बना है, तो उसे बनवाएं. सभी तरह के कागजात के साथ आवेदन को संबंधित बीडीओ कार्यालय में जमा कराएं, ताकि प्रमाणपत्रों के आधार पर लाभुकों का विकलांगता पेंशन चालू हो सके और उन्हें सरकार की योजना का लाभ मिल सके.

एमबी के हैं 83 मरीज : नालंदा जिले में कुष्ठ एमबी के कुल 83 मरीज हैं, जिनका इलाज अभी चल रहा है. एमबी के रोगी को करीब एक साल तक एमडीटी की दवा खानी पड़ती है. यह दवा जिला लेप्रोसी निवारण विभाग की ओर से मरीजों को नि:शुल्क उपलब्ध करायी जाती है.
एमबी के रोगी का समय पर इलाज नहीं होने से समाज में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है. अतएव कुष्ठ एमबी के रोगी चिह्नित होते हैं, तो उनका तुरंत इलाज किया जाये, ताकि संक्रमण का फैलाव न हो सके. उन्होंने बताया कि इसी तरह जिले में चाइल्ड के 37 रोगी हैं. उनका भी इलाज किया जा रहा है. उन्होंने कर्मियों को निर्देश दिया कि जिन घरों में एमबी या चाइल्ड के रोगी हैं, उन घरों के हर सदस्यों की जांच की जाये, ताकि पता चल सके उनके परिवार सुरक्षित हैं या नहीं. यदि लक्षण मिलता है, तो संबंधित लोगों को भी दवा दी जायेगी. साथ ही आसपास में रहने वाले लोगों के शरीर के अंगों की जांच की जाये, ताकि इस रोग पर पूरी तरह से काबू पाया जा सके.
कुष्ठ विकलांगता ऑपरेशन की बनाएं सूची
उन्होंने पारा मेडिकल वर्करों व अचिकित्सक सहायकों को निर्देश दिया कि ऑपरेशन के लिए भी मरीजों की पहचान करें. जो मरीज कुष्ठ रोग से अपंग हो गये हैं और उन्हें ऑपरेशन की जरूरत है, उनकी सूची बनाएं. सूचीबद्ध रोगियों का आरसीएच ऑपरेशन विभाग की ओर से सासाराम में कराया जायेगा. यह शल्य चिकित्सा सेवा रोगियों को नि:शुल्क उपलब्ध करायी जायेगी. उन्होंने कहा कि चयनित रोगियों के ऑपरेशन से लेकर आने-जाने तक के खर्च का वहन जिला लेप्रोसी विभाग की ओर से किया जायेगा. साथ ही सासाराम में रहने, खाने व नाश्ते की भी व्यवस्था रहेगी. श्री उमेश प्रसाद ने कर्मियों को टास्क दिया कि इलाजरत मरीजों पर भी गहन नजर रखें. क्षेत्र भ्रमण के वक्त इस बात पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इसका मुख्य उद्देश्य है कि लेप्रोसी के रोगी बीच में दवा न छोड़ पाएं. नियमित रूप से दवा का सेवन करने से यह बीमारी पूरी तरह से ठीक हो जाती है. कुष्ठ साध्य रोग है. इस रोग के लक्षण प्रतीत होने के तुरंत बाद निकट के अस्पतालों में जाकर इलाज कराएं. मौके पर विजय कुमार, गोरेलाल, राणा बसंत सिंह, अवधेश, महेश आदि लोग मौजूद थे.

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