नालंदा : भारतीय जनता पार्टी कोई भी अनहोनी काम कर सकती है. होनी को अनहोनी और अनहोनी को होनी भी कर सकती है. इसका ताजा उदाहरण है भारतीय जनता पार्टी की नालंदा जिला कमेटी. जिला कमेटी के अलावा एक भारतीय जनता अति पिछड़ा मंच है. इस मंच का अध्यक्ष अति पिछड़ा समाज का कोई सदस्य बन सकता है,
लेकिन वर्तमान जिला कमेटी ने इस पद पर एक अनुसूचित जाति के सदस्य को अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया है. इससे भारतीय जनता पार्टी में खलबली मच गयी है. प्रखंड और जिला से लेकर राज्य स्तर तक यह मामला पहुंच गया है. राज्य स्तर के अधिकारी भी इस गलती को स्वीकारने लगे हैं. भाजपा अति पिछड़ा मंच के पूर्व जिलाध्यक्ष दयानंद प्रसाद गुप्ता बताते हैं कि नियमानुसार भाजपा अति पिछड़ा मंच का जिला अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग का ही कोई सदस्य हो सकता है, लेकिन वर्तमान कमेटी ने इस पद पर अनुसूचित जाति के सिया शरण आर्य को अध्यक्ष बनाया है. जो बिल्कुल गैर-जिम्मेदाराना और पार्टी के नियम के खिलाफ है.
उन्होंने बताया कि सियाशरण आर्य ततवा जाति से आते हैं. ततवा जाति को बिहार सरकार ने वर्षों पूर्व अनुसूचित जाति का दर्जा दिया है. इस परिस्थिति में उन्हें भाजपा अति पिछड़ा मंच का अध्यक्ष नहीं बनाया जा सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि जान बूझकर अनुसूचित जाति के बिरादरी को अति पिछड़ा मंच का अध्यक्ष बनाया गया है. यह पार्टी और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नाइंसाफी है. उन्होंने बताया कि वह इस मामले को लेकर भाजपा अति पिछड़ा मोरचा के प्रदेश अध्यक्ष से भी शिकायत किया है. प्रदेश अध्यक्ष ने इस गलती को स्वीकार भी की है. श्री गुप्ता ने प्रदेश नेतृत्व से अति पिछड़ा मंच के अध्यक्ष पद पर मनोनीत अनुसूचित जाति के सदस्य को तत्काल प्रभाव से हटाने और नये सिरे से भाजपा अति पिछड़ा मंच के अध्यक्ष का चुनाव करने की गुहार लगायी है. इस संबंध में पूछे जाने पर भारतीय जनता पार्टी के नालंदा जिला अध्यक्ष प्रोफेसर राम सागर सिंह ने बताया कि पार्टी के पास सरकार का नोटिफिकेशन नहीं था.
