अनदेखी. घायल को पटना ले जाने के लिए नहीं मिला एंबुलेंस, हुई मौत
लोगों ने पीएचसी को बनाया निशाना
पीएचसी में तोड़फोड़ व जाम की सड़क
बिहारशरीफ/ करायपरसुराय : दीवार से दबकर घायल हुए आठ वर्षीय बच्चे की मौत के बाद आक्रोशित लोगों ने जमकर बवाल काटा. इस दौरान अस्पताल की कुव्यवस्था व डॉक्टर की मनमानी का आरोप लगाते हुए करायपरसुराय पीएचसी को निशाना बनाते हुए नाराज ग्रामीणों ने तोड़फोड़ भी की. इसके बाद स्वस्थ्य कर्मियों के साथ मारपीट की. डियावां-पभेड़ी मार्ग को करीब पांच घंटे तक जाम कर प्रदर्शन भी किया. बताया जाता है कि रविवार की सुबह करायपरसुराय थाना क्षेत्र के कुड़ी पोखर मोहल्ले में मिट्टी के दीवार से दबकर रोहित प्रसाद के एकलौता आठ वर्षीय पुत्र प्रियांशु कुमार गंभीर रूप से जख्मी हो गया था.
जिसे परिजनों ने इलाज के लिए पीएचसी ले गया. जहां उपस्थित डॉक्टर ने बिना कुछ ट्रिटमेंट किये पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया. लेकिन घायल को पटना ले जाने के लिए एंबुलेंस की मुहैया नहीं कराया गया. जबकि पीएचसी के अधीन में प्राइवेट एंबुलेंस खड़ी थी. परिजनों ने काफी आरजू विनती एंबुलेंस देने के लिए डॉक्टरों से की. लेकिन कुछ नहीं सुना गया. अंत में काफी समय बाद परिजनों ने एक टेंपो रिजर्व कर पटना जा रहा था की रास्ते में ही मौत हो गयी. बच्चे के मौत के बाद लोगों में आक्रोश फूट पड़ा और उग्र रूप लेते हुए पहले पीएचसी केंद्र का निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ करने लगा. इसके बाद उपस्थित कर्मियों के साथ मारपीट करने लगे, जहां अस्पताल छोड़ सभी स्वास्थ्य कर्मी भाग गये. उसके बाद आक्रोशित लोगों ने पीएचसी के सामने मुख्य मार्ग पर शव को रखकर डियावां-पभेड़ी सड़क को जाम कर प्रदर्शन किया. हंगामा व सड़क जाम की सूचना मिलते ही करायपरसुराय थानाध्यक्ष राजेश कुमार, हिलसा थानाध्यक्ष आरके झा तथा चिकसौरा थानाध्यक्ष राकेश मालाकार व अन्य पदाधिकारी पहुंच कर नाराज लोगों को समझाने का प्रयास किया. लेकिन असफल रहे. लोगों की मांग था कि मृतक परिवार को मुआवजा, पीएचसी में एंबुलेंस की सुविधा, लापरवाह डॉक्टर व कर्मी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की. सूचना पाकर पहुंचे जिला चिकित्सा प्रभारी व वरीय पदाधिकारी के द्वारा पीएचसी में एंबुलेंस देने व डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की आश्वासन के बाद लोगों को गुस्सा शांत हुआ और सड़क को जाम से मुक्त कराया गया. वहीं तत्काल मृतक के परिजन को परिवारिक लाभ के तहत बीडीओ प्रेम राम के द्वारा 20 हजार रुपया दिया गया.
एंबुलेंस की नहीं है सुविधा डॉक्टर रहते हैं गायब: लोगों ने बताया कि पीएचसी सिर्फ नाम का है. यहां ना डॉक्टर है और नहीं दवा. लोग मजबूरी में मरीज को निजी क्लिनिक में इलाज करा रहे हैं. इस अस्पताल के भरोसा अगर कोई मरीज रहता है तो उसके स्वस्थ्य होने संभावना नहीं रहती है.
तीन दिन पूर्व नवजात की भी हुई थी मौत: करायपरसुराय पीएचसी में इन दिनों व्यवस्था चरमरा गयी थी. चरमराई व्यवस्था के कारण मरीजों की मौत होने की लोग बात कर रहे हैं. बीते तीन दिनों भी एंबुलेंस के अभाव में एक नवजात शिशु की मौत हो गयी थी. करायपरसुराय थाना क्षेत्र के स्तरजबग गांव निवासी नागेश्वर बिंद की पुत्री चनमा देवी ने पीएचसी में बच्ची की जन्म दी थी, जहां नवजात को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. इसको लेकर डॉक्टर ने पटना पीएमसीएच रेफर कर दिया था, लेकिन एंबुलेंस के अभाव में नवजात की मौत हो गयी.
घटना के बाद परिजनों में मचा कोहराम:रविवार को मिट्टी की दीवार से दबकर घायल हुए बच्चे को इलाज के अभाव में मौत के बाद इलाके में कोहराम मच गया है. वहीं परिजन चीत्कार उठे. बताया जाता है कि करायपरसुराय थाना क्षेत्र के कुड़ी पोखर गांव निवासी रोहित प्रसाद का एकमात्र इकलौता पुत्र प्रियांसु था. जिसकी मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया है. मां पुत्र के शव में लिपट लिपट कर दहाड़ मार रो रही थी. वहीं पिता की आंखों का आंसू नहीं थम रही है.
डॉक्टर का मिलता सहयोग तो बच जाती जान:
रविवार को दीवार से दबकर जख्मी हुए बच्चे को अगर पीएचसी का थोड़ा सहयोग मिला होता तो शायद उसकी जान बच सकती थी. यहीं नहीं घायल बच्चे को प्राथमिक उपचार के बाद एंबुलेंस की सुविधा दी जाती तो बच्चे की जान बचने की संभावना थी. लेकिन पीएचसी की डॉक्टर ने बिना प्राथमिक उपचार किये उसे पटना रेफर कर दिया. साथ ही एंबुलेंस भी अस्पताल से उपलब्ध नहीं कराया गया.
