ओपीडी में रोगियों को होती परेशानी
चंडी : अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों को सिजेरियन की सुविधा नहीं मिल पा रही है. अस्पताल में सर्जन तो कार्यरत हैं पर मूर्च्छक का पद रिक्त रहने व ओटी में आवश्यक उपकरणों की कमी के वजह से रोगियों को सिजेरियन की सुविधा नहीं मिल पा रही है.
लिहाजा संबंधित मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है.सिजेरियन की सुविधा के लिए रोगियों को या तो सदर अस्पताल जाना पड़ता है या निजी क्लिनिकों का सहारा लेना पड़ता है.यह हाल है स्थानीय पीएचसी सह रेफरल अस्पताल का. इस अस्पताल परिसर में फिलहाल पीएचसी व रेफरल अस्पताल संचालित हो रहे हैं.रेफरल में सर्जन तैनात हैं.पर मूर्च्छक व ओटी में आवश्यक उपकरणों के अभाव में चाहकर भी मरीजों को सिजेरियन का लाभ पहुंचाने में यह संस्थान सफल नहीं हो पा रहा है.
इस अस्पताल में घायल मरीजों को मरहम पट्टी करने वाला एक ड्रेसर तक पदस्थापित नहीं है.एेसे रोगियों को जख्म पर मरहम लगाने में आये दिन फजीहत झेलनी पड़ती है.संबंधित रोगियों को अस्पताल में कार्यरत कर्मी ही किसी तरह घायलों को जख्म पर मरहम पट्टी करते हैं.इस अस्पताल में ड्रेसर का पद तो विभागीय तौर पर स्वीकृत है,लेकिन वर्षों से ड्रेसर का पद रिक्त पड़ा है.नूरसराय-दनियावां मार्ग पर अवस्थित चंडी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र इन दिनों महज पांच चिकित्सा पदाधिकारियों के सहारे चल रहा है.जरूरत है छह डॉक्टरों की. पांच में से एक प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ही शामिल हैं.प्रभारी के पास अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था से लेकर विभागीय कार्यों की अहम जिम्मेवारी होती है.
इस अस्पताल में दंत चिकित्सक पदस्थापित हैं. लिहाजा इस रोगी का इलाज कराने में आसानी होती है. साथ ही महिला डॉक्टर की पदस्थापना होने से महिला रोगियों को इलाज कराने में सहूलियत होती है.
हर दिन दो से अधिक मरीज इलाज को आते
इस अस्पताल के ओपीडी में इलाज को प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से दो सौ से ज्यादा मरीज अपनी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए हर दिन आते हैं.ओपीडी में जीवनरक्षक दवा उपलब्ध है. जो डॉक्टरों के सलाह के अनुसार दी जाती है.इंडोर में भी दवाइयां सहज रूप से उपलब्ध हैं.एक्सरे की भी सुविधा मिल रही है.साथ ही इमरजेंसी रोगियों के लिए एंबुलेंस चिकित्सा सेवा भी अस्पताल में सहज रूप से उपलब्ध है.जिससे जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध करायी जाती है.दवा वितरण काउंटर पर फार्मासिस्ट दवा का वितरण करते हैं.स्वीकृत पदों के अनुरूप ही यहां एएनएम की कमी है.
प्यास बुझाने में दिक्कत
इस अस्पताल में कहने को तो पेयजल के लिए चार चापाकल लगे हुए हैं.पर तीन चापाकल खराब पड़े हुए हैं जबकि एक चापाकल से गंदा पानी निकल रहा है.लिहाजा मरीजों व उनके अभिभावकों को इस भीषण गरमी में अपने हलक को तर करने में पसीने बहाने पड़ रहे हैं.लोग अस्पताल परिसर से बाहर से पीने के पानी लाने को विवश हो रहे हैं.प्रसूता को प्रसव की सुविधा सहज रूप से उपलब्ध करायी जा रही है.
