पीएम व सीएम का फूंका गया पुतला
अधिकारियों व किसानों के बीच झड़प
बिहारशरीफ/हरनौत : संघर्षशील किसान मजदूर संघ के आह्वान पर जिले के कई प्रखंडों के किसान अपने विभिन्न मांगों को लेकर सोमवार को साढ़े नौ बजे से प्रखंड मुख्यालय स्थित चंडी मोड़ पर एनएच 31 व एन एच 30 ए को करीब छह घंटे तक जाम कर दिया.आंदोलनकारियों द्वारा मौके पर पीएम व सीएम के पुतले फूंके गये.जाम के दौरान वाहनों का परिचालन पूरी तरह ठप रहा.
वहीं शव वाहन एवं एंबुलेंस को जाम से मुक्त रखा गया. प्रदर्शनकारी केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के खिलाफ किसान विरोधी नीति को लेकर जय जवान जय किसान का नारा लगा रहे थे.संघ के अध्यक्ष जयप्रकाश नारायण सिंह ने बताया कि किसान आज गरीबी की मार झेल रही है.
उनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं है.किसानों के उत्पाद को आज कोई खरीदने वाला नहीं है.अनाज की कीमत दस पंद्रह वर्ष पूर्व वाला हो गया है.जिससे किसान अपने बच्चों की पढ़ाई की फीस भी नहीं दे पा रहे हैं. इसके लिये केंद्र व राज्य सरकार दोषी है. किसानों के लिये प्रखंड स्तर पर एक क्रय केंद्र खोलने की भी मांग भी की गयी. साठ वर्ष के ऊपर वाले किसानों को अन्नदाता पेंशन योजना देने की मांग की गयी. जाम को देखते हुए पुलिस को सुबह से ही बाजार में कई जगहों पर तैनाती कर दी गयी थी. कार्यक्रम के अंत में संघ के प्रतिनिधिमंडल के द्वारा डीडीसी को ज्ञापन सौंपा गया.
डीडीसी से आश्वासन मिलने के बाद किसानों ने जाम तोड़ा. संघर्षशील किसान मजदूर संघ के आह्वान पर किसानों ने प्रखंड के कई जगहों पर सड़क जाम किया. जिसमें कल्याणविगहा हरनौत मोड़ व तेलमर शामिल रहा. वहां भी वाहनों की कतार लग गयी.
किसानों द्वारा लगाये गये जाम को देखते हुए पुलिस प्रशासन काफी चौकस रही. विशेष व्यवस्था के तौर पर एसएसबी के जवान तैनात किये गये थे. किसानों ने अधिकारियों के आश्वासन के बाद जुलाई माह तक अपने आंदोलन को स्थगित करने का आश्वासन दिया. किसानों ने यह भी कहा है कि जुलाई तक उनकी मांग के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं की गयी तो आगे आंदोलन को और तेज किया जायेगा.1974 जेपी आंदोलन के आंदोलनकारियों ने सोमवार को काला दिवस मनाया. किसान संघ के द्वारा आयोजित चक्का जाम कार्यक्रम को समर्थन करते हुए चंडी मोड़ पर एन एच 31 एवं एनएच 30 ए को जाम करते हुए अंतिम समय तक डटे रहे.जेपी आंदोलनकारी रंजीत सिंह ने बताया कि सरकार की दोरंगी नीति के कारण किसान आज सड़क पर हैं.
अधिकारियों ने दी थी धमकी,संघ के सदस्यों को बनाया बंधक
संघ के सदस्यों ने बताया कि संघर्षशील किसान मजदूर संघ के द्वारा चक्का जाम कार्यक्रम स्थगित करने को लेकर प्रखंड स्तर के अधिकारियों ने संघ के सदस्यों को पच्चीस जून की संध्या साढ़े चार बजे को थाने पर बुलाया गया.जहाँ करीब चार घंटे तक कार्यक्रम स्थगित करने को लेकर बैठक चली.जिसमें मनीष कुमार,चंद्रउदय कुमार,विरिंद सिंह,सत्येंद्र सिंह,ब्रजकिशोर सिंह शामिल हुए.वहां से बात बनते न देख सभी लोगों को वाहन में बैठकार जिलाधिकारी के पास ले जाया गया.वहां भी आधे घंटे तक बैठक हुई.अधिकारियों ने कार्यक्रम रोकने को लेकर धमकी भी दी.साथ ही रात में प्रखंड के सिरसी गांव में प्रशासन एवं संघ के सदस्यों के साथ बैठक किया. बारह बजे रात संघ के सदस्यों को छोड़ा गया.
संघ के सदस्य ने बताया कि प्रशासन ने कहा कि आप लोग आंदोलन से हट जाएं. उन्होंने बताया कि बंधक बनाने से प्रचार प्रसार की कमी होगी.कार्यक्रम के अंत में किसान कार्यकर्ताओं द्वारा सीएम नीतीश कुमार व पीएम नरेंद्र मोटी का पुतला फूंका गया.कार्यक्रम के अंत में किसान कार्यकर्ताओं के द्वारा सीएम नीतीश कुमार एव पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका गया एवं लाठी डंडे से पिटाई की गई.ये पहली घटना है ,जहां सीएम अपने गृह प्रखंड मुख्यालय में ही किसानों के द्वारा उनका पुतला दहन करते हुए दिखे.
अधिकारियों और किसानों के बीच हुई झड़प
प्रदर्शन के दौरान किसानों और अधिकारियों के बीच आंशिक झड़प हुई. झड़प की घटना उस वक्त घटी जब एसडीओ अरुण कुमार व एसडीपीओ निशित प्रिया किसानों को जाम हटाने को लेकर समझाने गए थे. किसान मुन्ना कुमार ने मांग करते हुए अधिकारियों से कहा कि किसानों की परेशानियों को देखने वाला कोई नहीं है. नौकरी वाले हड़ताल कर अपनी मांग पूरी कर लेता है.
जबकि किसान बेजुवान पशु की तरह चुप रहता है.सरकार के किसान विरोधी नीति के कारण ही आज किसान खेत के बजाय सड़क पर है.इस पर अधिकारी भड़क गए और नौकरी कर लेने की बात कही.अधिकारी ने जबरन जाम हटवाना चाहा, जिसपर किसान भड़क गए और नीतीश कुमार ,नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद का नारा लगाने लगे.बाद में पहुंचे डीडीसी एवं किसानों के बीच भी बहस हुई.
जाम के दौरान झारखंड के जज फंसे
संघर्षशील किसान मजदूर संघ के द्वारा चक्का जाम के दौरान झारखंड के जज भी फंसे दिखे. वे करीब आधे घंटे तक जाम में फंसे रहे. बाद में स्थानीय लोगों के द्वारा बताए जाने पर दूसरे मार्ग से वापस अपने गंतव्य तक जा सके. वे अपने परिवार के यहां बख्तियारपुर थाने के सवनिमा गांव जा रहे थे.
