जिले में 23 हजार मीटरिक टन मछली उत्पादन का लक्ष्य

विभाग ने की कई योजनाओं की शुरूआत बिहारशरीफ : मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाओं की शुरूआत की गयी है. जिले के मछली प्रेमियों को अब दूसरे प्रदेश की मछलियों पर निर्भर रहने से शीघ्र ही छुटकारा मिल जायेगा. मछली प्रेमियों को स्थानीय मछली ही सुगमता पूर्वक उपलब्ध […]

विभाग ने की कई योजनाओं की शुरूआत

बिहारशरीफ : मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई लाभकारी योजनाओं की शुरूआत की गयी है. जिले के मछली प्रेमियों को अब दूसरे प्रदेश की मछलियों पर निर्भर रहने से शीघ्र ही छुटकारा मिल जायेगा. मछली प्रेमियों को स्थानीय मछली ही सुगमता पूर्वक उपलब्ध हो जायेगी. मत्स्य विभाग ने 2017-18 वित्तीय वर्ष में जिले में मछली उत्पादन का 23 हजार मीटरिक टन लक्ष्य निर्धारित किया गया है. लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभाग पूरी तत्परता से योजनाओं पर कार्य शुरू कर दी है. तालाब निर्माण के लिए लक्ष्य निर्धारित जिले में मछली उद्योग का जाल बिछाने के लिए अधिक से अधिक तालाब निर्माण का लक्ष्य रखा गया है.
प्रति हेक्टेयर तालाब निर्माण पर सात लाख रुपया निर्धारित किया गया है. प्रति हेक्टेयर जल क्षेत्र के लिए 50 प्रतिशत अनुदान दिया जयेगा. मत्स्य आहार के लिए प्रति हेक्टेयर नवनिर्मित तालाब में डाले गये मत्स्य बीज आहार के लिए प्रति हेक्टेयर 75 प्रतिशत अनुदान की राशि दी जायेगी. जिले में नये तालाब खोदने का लक्ष्य 10 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है. जिले में मत्स्य पालन के लिए 12 लाख ट्यूबवेल व पंपसेट लगाने की योजना बनायी गयी है. मुख्यमंत्री मत्स्य विकास योजना के तहत सोलर ट्यूबवेल एवं पंपसेट लगाने के लिए 70 प्रतिशत अनुदान निर्धारित किया गया है. इस योजना के तहत कम से कम एक एकड़ जल क्षेत्र वाले किसान आवेदन कर सकते हैं. मत्स्यजीवी सहयोग समिति के सदस्यों को 70 प्रतिशत के अनुदान पर मोपेड, आइस बाॅक्स उपलब्ध कराने की योजना है.
क्या कहते हैं अधिकारी:
‘‘मत्स्य विभाग का मुख्य लक्ष्य है कि उपभोक्ताओं को आसानी से ताजी मछली उपलब्ध करायी जाये. कृषकों को अतिरिक्त आय स्रोत बढ़ाने के लिए इस उद्योग का जाल बिछाया जायेगा. ’’
अशोक कुमार सिन्हा, जिला मत्स्य पदाधिकारी, नालंदा

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