राजबल्लभ पक्ष से सुप्रीम कोर्ट वकील ने की बहस

आरोप के साक्ष्य को अभियोजन को साबित करने की दी चुनौती बिहारशरीफ : जिला न्यायालय के पाक्सो स्पेशल एडीजे प्रथम शशि भूषण प्रसाद सिंह के कोर्ट में नाबालिग छात्रा दुष्कर्म कांड में आरोपित पक्ष से बहस जारी है. अब तक पूर्व से आरोपित पक्ष से मुख्य बहस का भार अधिवक्ता वीरेन कुमार व कमलेश कुमार, […]

आरोप के साक्ष्य को अभियोजन को साबित करने की दी चुनौती

बिहारशरीफ : जिला न्यायालय के पाक्सो स्पेशल एडीजे प्रथम शशि भूषण प्रसाद सिंह के कोर्ट में नाबालिग छात्रा दुष्कर्म कांड में आरोपित पक्ष से बहस जारी है. अब तक पूर्व से आरोपित पक्ष से मुख्य बहस का भार अधिवक्ता वीरेन कुमार व कमलेश कुमार, जिसमें सहयोगी भूमिका अधिवक्ता वीरमणि कुमार, संजय कुमार व विवेकानंद प्रसाद के कंधों पर रही है. जबकि 13 जून के बहस के आरोपित राजबल्लभ पक्ष से सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता तनवीर अहमद ने भार संभाला है. असरदार बहस करते हुए कहा कि आरोपित पर जितनी भी धाराओं 366ए, 376, 4, 8, 17 पाक्सो एक्ट तथा 4, 5, 6 इमोरल ट्रैफिक एक्ट आदि के तहत आरोप दर्ज किये गये हैं.
इसे साबित करने की जिम्मेदारी और भार अभियोजन पक्ष पर है. परंतु अभियोजन पक्ष से साक्ष्यों का अभाव और कहानियों का जाल अधिक है. जिसकी स्पष्ट जानकारी होती है कि बर्थ डे पार्टी के नाम पर आधा किलोमीटर चलने के बजाय भरावपर के बदले 31 किलोमीटर बख्तियारपुर की दूरी तय की. पुन: उसके बाद वहां से रिक्शा से पार्टी तक पहुंचने के बजाय घटनास्थल तक पहुंची. मोबाइल युग में यह कहना कि किसी को संदेश नहीं दिया. मंशा का पता चलता है. सुप्रीम व हाइकोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि आरोपित कई धाराएं निराधार है. जबकि अभियोजन न तो गाड़ी और न ही ड्राइवर को सामने ला सकी और न ही खोज सकी. इन धाराओं और आरोपों का कोई आधार नहीं है. जबकि प्राथमिकी, बयान और आरोप पत्र को ही देखा जाये तो इनका अपना ही गवाह टूटता नजर आता है. इन्हें अपने ही दिये बयान और साक्ष्य पर भरोसा नहीं है. ऐसे कई मामलों का भी हवाला दिया, जो कि सुप्रीम कोर्ट और हाइकोर्ट में चलते रहे हैं. जिनमें बदले की भावना से मुकदमा कर आरोपित बना फंसाया गया था. यह आरोप भी उसी श्रेणी का है. जबकि मेडिकल सहित कोई साक्ष्य अभियोजन पक्ष में नहीं है.

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