पहल. मनेरगा में बेहतर कार्य के लिए किया गया जिले का चयन
दो लाख मनरेगा मजदूरों को मिला काम
बिहारशरीफ : बारिश पर निर्भरता के कारण हर फसल को नुकसान उठाना पड़ता है. फसलों को बचाने व खेतों की पटवन के लिए वैकिल्पक व्यवस्था करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग द्वारा परंपरागत संसाधनों को विकसित किया गया है और किया जा रहा है. ताकि गर्मी के दिन में जल संकट को कम हो सके. साथ ही बरसात के दिनों में बारिश की पानी को संचय किया जा सके. जलसंचय के लिए जिला ग्रामीण विकास इकाई नालंदा ने छह प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं. इसी कड़ी में चेक डैम, आहर पइन की उड़ाही, खेत-पोखरी, सघन वृक्षारोपन, जल जागरूकता पर काम किया गया है.
ये सभी काम मनरेगा से कराये गये हैं. वैसे मनरेगा को गलत रूप में हमेशा जाना जाता था. मनरेगा के मतलब लूटखसोट. इस बदनामी से ऊपर उठकर कुछ करना काफी चुनौती भरा होता है. लेकिन सकारात्मक सोच के कारण न सिर्फ मनरेगा से काम कराये गये बल्कि कराये गये कार्य के आधार पर मनरेगा राष्ट्रीय अवार्ड के लिये भी नालंदा का चयन हुआ है. 19 जून को दिल्ली में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों डीडीसी कुंदन कुमार सम्मानित होंगे. मनरेगा अवार्ड के लिये चयन होने पर उनका कहना है कि साकरात्मक सोच ने सफलता दिलायी है. पहले चरण में नालंदा में 16 चेक डैम बनाये गये हैं.
बनाये गये चेक डैम से 130 गांवों के 14662 किसान लाभांवित हुए हैं. हजारों एकड़ भूमि सिंचित हुई. आहर पइन के जीर्णोद्धार से 1300 किलोमीटर की लंबाई में 2000 पइन और आहर पर काम किया गया. निजी भूमि पर खेत- पोखरी निर्माण व 67 परंपरागत तालाब का जीर्णोद्वार कराया गया. चेक डैम से खेतों की सिंचाई तो हुई ही है. आस-पास के जलस्तर को लेबल में रखने में कारगर साबित हो रहा है. खेत-पोखरी में मछली पालन करके किसान कमाई भी कर रहे हैं.
जिले में अब तक 537 आहर पइन की उड़ाही हो चुकी हैं. आहर पइन की उड़ाही होने से बारिश होने पर 14 लाख 87 हजार पानी को स्टोर करने की क्षमता बढ़ गयी हैं. व्यापक पैमाने पर काम होने से और भी पानी को स्टॉक किया जा सकेगा हैं. डीआरडीए के सहायक अभियंता विनोद कुमार सिन्हा बताते हैं कि बेहतर मार्गदर्शन करने के कारण ही मनरेगा को नयी पहचान मिली है. जॉब आधारित योजना के कारण काम लोगों को मिला है. दूसरे विभागों के अनुपात में कम व्यय पर चेक डैम बनाये जा रहे हैं.
मनरेगा द्वारा इस कार्य को धरातल पर उतारा जा रहा है. चूंकि मनरेगा जॉब आधारित योजना है. इस काम से जिले के दो लाख तीन हजार मैनडेट क्रियट किया गया है. वर्ष 2015-16 में एक लाख 1843761, वर्ष 2016-17 में 2546154 व वर्ष 2017-18 के चालू माह तक 566702 मानव दिवस सृजित किया गया. मनरेगा से एक मजदूर को साल में 100 दिन काम दिये जाने का प्रावधान है.
ताकि काम की तलाश में लोग बाहर नहीं जा सके.
बिहारशरीफ 20 14.39 795.7 0.4
रहुई 11 22.92 544.2 0.25
नूरसराय 43 31.64 775.88 0.36
हरनौत 19 16.8 1897 436.88
बिंद 10 7.94 12.67 358.77
सरमेरा 38 34.07 47.46 1334. 9 0.2
अस्थावां 17 14.2 1336 372. 64 0.25
राजगीर 28 24.80 2646 749.29 0.38
सिलाव 26 13.51 26.51 754.37 0.38
बेन 26 13.51 53.32 0.03
कतरीसराय 12 12.22 200.48 0.09
गिरियक 23 15.59 2184 618
हिलसा 52 47.79 67.71 1903.1
चंडी 38 27.38 29.88 846.1
नगरनौसा 52 47.7967.21 1903.1
थरथरी 25 19.8 25.91733.68
एकंगरसराय 52 33.17 44.351255.04
परबलपुर 16 10.18 1578 446.83
करायपरसुराय 25 17.95 17.92 5078.43
इस्लामपुर 26 21.6 40.94 1159.2
टोटल 537 416 .97 525.05 14870.23
