मुजफ्फरपुर के कांटी से मनोज कुमार मिश्र की रिपोर्ट
Muzaffarpur News: किसी भी समाज की प्रगति उसकी बेटियों की प्रगति से तय होती है. इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एनटीपीसी कांटी का सशक्त बालिका अभियान (गर्ल एम्पावरमेंट मिशन-जीईएम) ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई पहचान दे रहा है.
पिछले कई वर्षों से संचालित इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2023 से अब तक 120 बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं. वहीं इस वर्ष 25 मई से 20 जून तक चल रहे आवासीय प्रशिक्षण शिविर में नौ विद्यालयों की 50 छात्राएं भाग ले रही हैं.
पारदर्शी प्रक्रिया से होता है चयन
कार्यक्रम की शुरुआत बेसलाइन सर्वे से होती है. एनटीपीसी कांटी की टीम आसपास के गांवों और विद्यालयों में जाकर उन छात्राओं की पहचान करती है, जिन्हें ऐसे अवसरों की सबसे अधिक आवश्यकता होती है. चयनित छात्राओं को एक माह के पूर्णतः आवासीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल किया जाता है, जहां उन्हें विभिन्न विषयों और गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाता है.
पूरी तरह निःशुल्क है प्रशिक्षण शिविर
सशक्त बालिका अभियान की प्रमुख विशेषता यह है कि यह पूरी तरह निःशुल्क है. छात्राओं और उनके अभिभावकों को किसी प्रकार का खर्च वहन नहीं करना पड़ता. एनटीपीसी की ओर से आवास, भोजन, अध्ययन सामग्री, गणवेश, चिकित्सा सुविधा और प्रशिक्षण की सभी व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. प्रति छात्रा औसतन 60 से 70 हजार रुपये तक खर्च किए जाते हैं.
शिक्षा के साथ व्यक्तित्व विकास पर भी जोर
शिविर में छात्राओं को गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान और कंप्यूटर शिक्षा की कक्षाएं दी जाती हैं. इसके अलावा अंग्रेजी संवाद कौशल, योग, कराटे, नृत्य, संगीत, पेंटिंग, खेलकूद, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाता है. विभिन्न प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से उनमें नेतृत्व क्षमता और टीम भावना विकसित करने का प्रयास किया जाता है.
परियोजना प्रमुख ने बताई कार्यक्रम की अहमियत
एनटीपीसी कांटी के परियोजना प्रमुख पंकज कुमार गुप्ता ने कहा कि सशक्त बालिका अभियान केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के भविष्य में किया गया निवेश है. उन्होंने कहा कि जब एक बालिका शिक्षित, आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है.
छात्राओं में दिख रहा आत्मविश्वास
कार्यक्रम में शामिल मधुवन निवासी छात्रा दिव्या कुमारी ने बताया कि शिविर में आकर उन्होंने पहली बार कंप्यूटर चलाना सीखा. अब वे मंच पर आत्मविश्वास के साथ बोल सकती हैं और अंग्रेजी में बातचीत करने का प्रयास भी करती हैं. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने उन्हें अपने सपनों को साकार करने का विश्वास दिया है.
एक माह में दिखता है सकारात्मक बदलाव
कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों के अनुसार एक माह के प्रशिक्षण के बाद छात्राओं में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिलता है. संकोच से भरी बालिकाएं आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने लगती हैं और भविष्य को लेकर नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ती हैं. यही बदलाव सशक्त बालिका अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.
